उधर महाराष्ट्र ने दिल्ली सरकार की पानी की पेशकश ठुकराई, इधर लातूर की त्रासदी पर नाना पाटेकर रो पड़े

0

संवेदनशील कलाकार नाना पाटेकर ने हाल ही में एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में बेहद मर्मस्र्पशी बातों का साझा किया।

जब महाराष्ट्र मे सूखे की समस्या पर उनका पूछा गया कि क्या हालात सुधरे है या पहले से बेहतर हुए है तो इस पर नाना का कहना था कि हम हालात को खराब होने नहीं देगें, हम सबको मिलकर बेहतर प्रयास करने होगें।

“तु, मैं, ये अगर हम सब मिलकर सामने आएगें, आगे आएगें तो हालात सही हो जाएगें। ये कहने से काम नहीं चलेगा कि बहुत निराशाजनक चित्र है, है तो सही! लेकिन इसे सुधारने की कोशिश करेगें। ये गलत है कहने से काम नहीं चलेगा। आवाम को सामने आना होगा। चुप बैठने से तो काम नहीं चलने वाला है। सवाल करने की जरूरत है। ये क्या है? सरकारी मुलाजिम है, अगर वो काम नहीं करता तो जाकर बोलो उससे। ये क्या हो रहा है, क्यों नहीं हो रहा है। हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से तो कुछ होने वाला है नहीं, जाकर सवाल करो, ऐसा कैसे होगा।”

पत्रकार ने जब कहा कि लोग अपने कामों और लाइफ में ही इतने बिजी हो जाते है कि ये कर नहीं पाते तब नाना ने कहा कि इसका क्या मतलब जब तुम मरोगे तब ही तुम सवाल करोगे। दूसरे से जुड़ी हुई बात है तो क्या इसे छोड़ देना चाहिए।

“बराबर में कोई मर रहा है तो क्या ऐसे ही देखते रह जाना है। लोगों के सामने आने की एक वजह ये भी है कि लोगों ने अभी देखा नहीं कि किस पर क्या गुजर रही है। सिर्फ टीवी पर फोटो देख लिया तो उसे मान लिया। यहां आसमान के नीचे रहकर जो आदमी सह रहा है उसे वो आदमी कैसे समझेगा जो होटल में रहता है। अच्छा पानी पीता है, खाना खाता है, दोनों टाइम सो लेता है। जाकर उसको देखो जो जिसके पास आसमान के सिवा कुछ है ही नहीं। जानवर है! गाय-बैल उनको भी वो कुछ दे नहीं पा रहा है। ये वहीं किसान सूखे की वजह से मर रहा है जो हमारे लिये उगाते है, लेकिन जब उसका बाप बीमार होता है, बच्चे बीमार होते है, बीवी बीमार होती है तो उनकी दवाईयों तक का खर्च वो उठा नहीं पाता हैं। इतनी मंहगी दवाई है। खेती का जितना खर्चा है उससे कहीं ज्यादा मंहगी तो हमारी दवाईयां है।”

इतना कहते हुए नाना बेहद भावूक होते हुए रो पड़े,

“बताइए अब क्या करू मैं, फांसी क्यों ना लगा लूं, बच्चे खाना मांग रहे है मेरे, मां-बाप को दवा नहीं दे सकता, मर्द होने के नाते बीवी को कुछ नहीं लाकर दे सकता। फिर मैं क्या करूं, एक रस्सी लाता है और सोचता है क्यों ना इसे ही गले में डाल लूं। जब मैं किसी के लिये कुछ कर नहीं सकता तो क्यों ना मुझे मर ही जाना चाहिए। अब ये सब हम दूर बैठे टीवी पर फोटो देखकर तो नहीं समझ सकते हैं।”

महाराष्ट्र के लातूर में इस समय भारी त्रासदी चल रही है और महाराष्ट्र सरकार कह रही है कि चिंता की कोई बात नहीं है। तीन दिन पहले ही सिंचाई मंत्री ने दिल्ली सरकार से पानी लेने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। जिससे पता चलता है बड़े ओहदेदार लोग सिर्फ एयरकंडीशसं कमरों में बैठकर ही सोचते है जमीन की हकीकत से उनका कोई वास्ता नहीं होता है और ऐसे में नाना की कहीं सारी बातें सच साबित हो जाती हैं।

LEAVE A REPLY