मुजफ्फरपुर रेप कांड: विपक्ष के आरोपों पर बिहार के दोनों मंत्रियों ने कहा- आरोप सिद्ध होने पर मंत्री पद से दे देंगे इस्तीफा, जानें घटना की पूरी जानकारी

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बिहार के मुजफ्फरपुर के एक ‘बालिका गृह’ नाम के नारी निकेतन में मासूम बच्चियों के साथ यौन शोषण के आरोपों ने तूफान मचा दिया है। विपक्ष के भारी दवाब के बाद बिहार सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच का फैसला लिया है। बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 29 बच्चियों के यौन उत्पीड़न के सनसनीखेज खुलासे के बाद घटना की चर्चा पूरे देश में हो रही है। विपक्ष का कहना है कि जिन पर बच्चियों के साथ रेप के आरोप हैं उनको राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।

PTI

रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों के साथ लंबे समय से रेप होने का आरोप लगा है। सरकारी सहायता प्राप्त के इस शेल्टर होम का नाम ‘बालिका गृह’ है, जो कि एक एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से चलाया जाता है। इसमें 44 लड़कियां रह रही थीं। 30 मई को यहां से सभी 44 बच्चियों को मोकामा, पटना और मधुबनी में शिफ्ट किया गया और 31 मई को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

“आरोप सिद्ध होने पर मंत्री पद से दे देंगे इस्तीफा”

बालिका आश्रय गृह में 29 बच्चियों से रेप मामले में लग रहे आरोपों को बिहार के दोनों मंत्रियों ने आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया। समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने गुरुवार को कहा कि अगर आरोप सिद्ध हुए तो वे मंत्रीपद से इस्तीफा दे देंगे। समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने अपने सरकारी आवास पर पत्रकार वार्ता में अपने पति चंद्रशेखर वर्मा पर मुजफ्फरपुर बालिका गृह के सीपीओ रवि कुमार रौशन की पत्नी के आरोपों का खंडन किया।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक मंजू ने आरोप लगाया कि वह पिछड़ी और कमजोर जाति (कुशवाहा समुदाय) से हैं इसलिए उनके पति को मोहरा बनाया गया है। बता दें कि जेल में बंद सीपीओ रवि की पत्नी ने मंजू वर्मा के पति पर बालिका गृह में अपने साथ जाने वाले अधिकारियों को बाहर छोड़कर उसके भीतर जाने का आरोप लगाते हुए बताया था कि वहां की लडकियां उन्हें नेता जी के तौर जानती थीं।

विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मंजू वर्मा को बर्खास्त करने की मांग की थी। मंजू वर्मा ने कहा कि बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के दौरे के बाद साजिश के तहत आरोपी की पत्नी को उनके पति पर बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए उकसाया गया। उधर, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पलटवार किया।

सुरेश शर्मा ने मीडिया से कहा कि वह उन्हें चुनौती देते हैं कि अगर इस मामले में उनकी कहीं से भी कोई संलिप्तता साबित कर देते हैं तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। साथ ही चुनौती दी कि आरोप साबित नहीं होने पर तेजस्वी प्रतिपक्ष के नेता और विधायक पद से इस्तीफा दे दें। उन्होंने मानहानि नोटिस भेजने की भी बात कही। दरअसल तेजस्वी प्रसाद यादव ने सुरेश शर्मा का नाम लिए बिना आरोप लगाया था कि इस मामले में बिहार सरकार के एक स्थानीय मंत्री की भी संलिप्तता की चर्चा है जो कि हाल में पश्चिम बंगाल की यात्रा के क्रम में ‘कारनामा’ (एक होटल में मारपीट) किया था।

रेप कांड की होगी सीबीआई जांच

विपक्ष के भारी दवाब के बाद बिहार सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच का फैसला लिया है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने बालिका गृह की 29 बालिकाओं के यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई से कराने की गुरुवार (26 जुलाई) को अनुशंसा कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बहुत ही घृणित घटना घटी है और पुलिस पूरी मुस्तैदी से इसकी जांच कर रही है। सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है, किन्तु एक भ्रम का वातावरण बनाया जा रहा है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि भ्रम का वातावरण नहीं रहे, इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और प्रधान सचिव गृह को तत्काल इस मामले को जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द करने की सिफारिश की है। इस मामले की तहकीकात निष्पक्ष ढंग से हो, इसके लिए विपक्ष इसकी सीबीआई से, हाई कोर्ट की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग करता रहा है। यह मांग बिहार विधानमंडल के जारी मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर और बाहर लगातार उठी है।

ऐसे हुआ खुलासा

दरअसल, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस की ‘कोशिश’ टीम ने बिहार के कई जिलों में चलाए जा रहे बालिका गृहों को लेकर इसी साल फरवरी महीने में ‘सोशल ऑडिट’ किया था। जिसके बाद यह रिपोर्ट बिहार के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई। 100 पन्नों की इस रिपोर्ट में राज्य भर के बालिका गृहों के हालात और वहां रह रहीं बच्चियों के साथ होने वाले व्यवहारों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि यह रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में रह रहीं मासूम बच्चियों के साथ हुए बर्ताव की हो रही है।

15 मार्च को सौंपी गई यह रिपोर्ट दो महीने बाद 26 मई को जिलों की बाल संरक्षण इकाई को भेजी गई। इसी दिन मुजफ्फरपुर जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा ने एक पत्र समाज कल्याण विभाग के निदेशक को भेजा। 28 मई को वहां से जवाब आया कि सेवा संकल्प और विकास समिति के बालिका गृह में रह रही बच्चियों को कहीं और शिफ्ट किया जाए और एफआईआर दर्ज की जाए।

29 बच्चियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि

इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि मुजफ्फरपुर की बालिका गृह में रह रही बच्चियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण हो रहा था। यहां लड़कियों का मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता था। मामला उजागर होने के बाद वहां रह रही लड़कियों को तत्काल हटा लिया गया और उनकी मेडिकल जांच की गई। संस्था में रह रहीं 44 लड़कियों में से 42 की मेडिकल जांच कराई गई थी जिसमें से 29 बच्चियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। सात साल की बच्ची तक को दरिंदों ने नहीं छोड़ा था। वह बच्ची बोल नहीं पा रही है।

एक लड़की ने तो अपनी सहेली की हत्‍या कर शव को परिसर में ही दफना दिए जाने की भी बात कही है। 31 मई को एफआईआर दर्ज होने का बाद एनजीओ (जो आश्रय गृह को संचालित कर रहा था) के संचालक शहर के ही ताकतवर व्यक्ति ब्रजेश ठाकुर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि बाल संरक्षण विभाग के दिलीप शर्मा को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

कौन है ब्रजेश ठाकुर?

यह बालिका गृह ब्रजेश ठाकुर के घर में चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर प्रातः कमल और न्यूज नेक्स्ट नाम से अखबार भी निकालते हैं। दोनों अखबारों का दफ्तर भी इसी बालिका गृह के कैंपस में है। बीबीसी हिंदी के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर के पिता भी अखबार के धंधे में थे। उन पर अखबारों के लिए सब्सिडी के कागज बाजार में बेचने के आरोप थे और इसे लेकर उनके घर पर पहले भी सीबीआई की रेड पड़ चुकी है। ब्रजेश ठाकुर के घर में जो बालिका गृह चल रहा था उसे सरकार की आर्थिक मदद मिल रही थी। ब्रजेश ठाकुर के घर में यह बालिका गृह 31 अक्टूबर 2013 से चल रहा था।

 

 

 

 

 

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