“मुस्लिम व्यापारियों का गांव में प्रवेश निषेध है”; इंदौर में ग्रामीणों ने लगाए विवादास्पद पोस्टर, पुलिस ने दर्ज किया केस

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कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण जारी लॉकडाउन के बीच सोशल मीडिया पर सामने आए कथित “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम धर्म के प्रति पूर्वाग्रह) से जुड़े विवादास्पद पोस्टर को लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर जिल में पुलिस ने रविवार (3 मई) को आपराधिक मामला दर्ज किया। यह मामला इंदौर से करीब 65 किलोमीटर दूर देपालपुर थाना क्षेत्र के पेमलपुर गांव से जुड़ा है। कथित पोस्टर में इस गांव के नाम का इस्तेमाल करते हुए “घोषणा” की गई थी कि समस्त ग्रामवासियों की आज्ञा से यहां ‘मुस्लिम व्यापारियों का गांव में प्रवेश निषेध है’।

इंदौर

देपालपुर थाने के प्रभारी गोपाल परमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई (भाषा) को बताया कि पुलिस को सोशल मीडिया पर सामने आए अपुष्ट संदेशों के जरिए सूचना मिली थी कि किसानबहुल पेमलपुर गांव में इस आशय का विवादास्पद पोस्टर लगाया गया है। उन्होंने बताया, “पुलिस को करीब 1,000 की आबादी वाले पेमलपुर गांव में जांच के दौरान कहीं भी ऐसा कोई पोस्टर लगा नहीं मिला जिसमें धर्मविशेष के कारोबारियों का प्रवेश प्रतिबंधित करने की बात लिखी गई हो। हालांकि, हमें गांव के सरकारी स्कूल के पास एक फटे कागज के संदिग्ध टुकड़े जरूर मिले हैं।”

थाना प्रभारी ने बताया कि इन टुकड़ों के आधार पर भारतीय दंड विधान की धारा 505 (दो) (विभिन्न वर्गों में शत्रुता, घृणा या वैमनस्य फैलाने वाला कथन) और 201 (अपराध के सबूत मिटाना) के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, “हम विवादास्पद पोस्टर की सचाई का पता लगा रहे हैं, गांव के लोगों से भी इस बारे में जानकारी ली जा रही है। जांच के बाद उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पेमलपुर गांव के नाम से वायरल विवादास्पद पोस्टर का मुद्दा ट्विटर पर उठाया था। विवादास्पद पोस्टर को लेकर प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, “मध्य प्रदेश पुलिस को तत्काल कार्यवाही करने पर धन्यवाद। धार्मिक उन्माद फैला कर कोरोना से नहीं लड़ा जा सकता। कोरोना वायरस धर्म नहीं पहचानता।”

वहीं, इससे पहले दिग्विजय सिंह ने इस पोस्टर को शेयर करते हुए पीएम मोदी और सीएम शिवराज सिंह चौहान से सवाल पूछे थे। दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा था, “क्या यह कृत्य प्रधानमंत्री मोदी जी की अपील के विरुद्ध नहीं है? क्या यह कृत्य हमारे क़ानून में दण्डनीय अपराध नहीं है? मेरे ये प्रश्न मुख्य मंत्री शिवराज चौहान जा व मप्र पुलिस से हैं। समाज में इस प्रकार का विभाजन-बिखराव देश हित में नहीं है।”

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