एकता की मिसाल: कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को सिंघु बॉर्डर पर ‘फ्री’ में खाना खिला रहे है मुस्लिम, आंदोलन को बदनाम करने के लिए ‘गोदी मीडिया’ पर निकाली भड़ास

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मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में सिंघु बार्डर (दिल्ली-हरियाणा सीमा) पर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों को देशभर से समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस बीच, मुस्लिमों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर उनके लिए ‘खाने’ की व्यवस्था की हुई है। पंजाब के मुसलमानों के एक समूह प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों को वहां पर ‘फ्री’ में खाना खिला रहे है।

कृषि कानूनों
(फोटो: जनता का रिपोर्टर/ सुरेश कुमार)

इन मुसलमानों ने किसानों द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए और इस मुद्दे को एक सांप्रदायिक रंग देने के लिए ‘भारतीय मीडिया’ पर भी जमकर अपनी भड़ास निकाली हैं। बता दे कि, विरोध कर रहे किसानों ने विवादास्पद कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज करने की कसम खाई है।

किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा किए गए आश्वासन को भी खारिज कर दिया है कि कृषि सुधार उनकी आय को बढ़ाने में मदद करेंगे। किसानों का कहना है कि इस कानून से हमारा कोई फायदा नहीं है, हमें यह कानून नहीं चाहिए।

(फोटो: जनता का रिपोर्टर/ सुरेश कुमार)

किसानों को सिंघु बॉर्डर पर ‘फ्री’ में खाना खिला रहे है मुस्लिमोंं ने सोमवार को ‘जनता का रिपोर्टर’ के सहयोगी सुरेश कुमार शाह से बात की। इस दौरान उन्होंने हमें यह भी बताया कि यह किसानों के समर्थन में यहां पर क्यों और कब से खड़े हैं।

गौरतलब है कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं। वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों के इस आंदोलन को कई संगठनों और राजनितिक दलों का समर्थन मिल चुका है। किसानों के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार विपक्ष के साथ-साथ अपनी सहयोगी पार्टियों के भी निशाने पर आ गई है।

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