मुम्बई फिल्म फेस्टिवल में नहीं दिखाई गई पाकिस्तानी फिल्म ‘जागो हुआ सवेरा’

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सरहदों का विवाद अब ज़ेहनों में भी घर कर गया हैं। 20 से 27 अक्टुबर तक चलने वाले मुम्बई फिल्म फेस्टिवल में दुनियाभर की फिल्में दिखाई जाएगी लेकिन पाकिस्तानी फिल्म ‘जागो हुआ सवेरा’ को मुम्बई फिल्म फेस्टिवल में दिखाने से मना कर दिया गया है। इन दिनों सभी मुद्दों पर दो खेमों में बटा हुआ भारतीय फिल्म उद्योग अब खुलकर सामने है। बीजेपी सांसद परेश रावल ने अपने टिवीट से इस बात को प्रमाणित भी कर दिया है कि आतंकवाद ने भारतीय फिल्म उद्योग की एकजुटता को भी समाप्त कर दिया है।
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मूल रूप से पाकिस्तान में बनाई गयी ‘जागो हुआ सवेरा’ एक दस्तावेजी धरोहर वाली फिल्म है जो जितनी अधिक पाकिस्तानी है उससे कहीं अधिक हिन्दुस्तानी। इस फिल्म में मुख्य भुमिका भारत की तृप्ति मित्रा ने निभाई थी और संगीत दिया था पश्चिम बंगाल के तिमिर बाॅरोन ने जबकि कहानी का मूल आधार बंगाली लेखक माणिक बंधोपाध्याय थे। फिल्म की सिनेमट्रोग्राफी ब्रितानी मूल के केमरामैन ने की थी। जबकि फिल्म के संवाद फैज अहमद फैज ने लिखे थे और निर्देशन किया था पाकिस्तान के ए जे कारदान ने।
इस फिल्म के दुनियाभर में सुर्खिया बटोरी है आजादी के बाद 50 के दशक को दर्शाती ये फिल्म तब के पूर्वी पाकिस्तान में मेघना नदी किनारे ढाका के पास एक गाँव की कहानी है। इसमें मछुआरों की दुश्वारियों भरी जिंदगी के बारे में बताया गया है।
भारतीय फिल्मों में पाकिस्तानी कलाकारों के बैन को लेकर पहले ही विवाद गरमाया हुआ है अब फिल्म फेस्टिवल में पाकिस्तानी फिल्मों को प्रतिबंधित कर हम सरहद के सोहार्द को बहुत जल्द खत्म कर देगें।

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