खुलने से पहले ही जियो इंस्टीट्यूट को विशेष दर्जा दिलाने के लिए पूर्व सचिव की मदद से मुकेश अंबानी ने खुद संभाला था मोर्चा

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छह विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ठ संस्थान का दर्जा प्रदान करने की घोषणा की है, जिनमें तीन सरकारी और तीन प्राइवेट विश्वविद्यालय शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बंबई और आईआईएससी बेंगलुरु शामिल हैं। जबकि मंत्रालय ने निजी क्षेत्र से मनीपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को भी उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान किया है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि देश के लिए उत्कृष्ठ संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) काफी महत्वपूर्ण है। हमारे देश में 800 विश्वविद्यालय हैं, लेकिन एक भी विश्वविद्यालय शीर्ष 100 या 200 की विश्व रैंकिंग में शामिल नहीं है। आज के निर्णय से इसे हासिल करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने कहा कि इससे इन संस्थानों के स्तर एवं गुणवत्ता को तेजी से बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और पाठ्यक्रमों को भी जोड़ा जा सकेगा।

मुकेश अंबानी ने खुद संभाला था मोर्चा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जियो इंस्टीट्यूट को विशेष दर्जा दिलाने के लिए खुद रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने मोर्चा संभाल रखा था। रिपोर्ट के मुताबिक छह इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का चयन करने वाली कमिटी के सामने खुद मुकेश अंबानी ने प्रजेंटेशन दिया था। मुकेश के साथ विनय शील ओबरॉय भी थे, जिन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव के पद से रिटायर होने के सालभर बाद एजुकेशन के मामले में एडवाइजर के रूप में रिलायंस को जॉइन किया था। ओबेरॉय उस 8 सदस्‍यीय टीम का हिस्‍सा थे जिसने पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त एन गोपालास्‍वामी की अध्‍यक्षता में बनी कमेटी के सामने प्रजेंटेशन दिया।

अंग्रेजी अखबार द इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी को इंस्‍टीट्यूट के सभी पहलुओं के बारे में अच्‍छे से पता था और उन्‍होंने अकेले ही कमेटी के सभी सवालों के जवाब दिए। बताया जाता है कि अंबानी ने ऐसा ही प्रस्ताव यूपीए सरकार के वक्त भी दिया था, जब विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों के प्रस्ताव पर विचार चल रहा था। ओबरॉय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में मार्च 2016 में टॉप पोस्ट पर थे, जब वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूट्स या इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेंस की स्कीम की घोषणा केंद्रीय बजट में की गई थी।

ओबराय के मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव रहते इस योजना पर मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच गहन चर्चा हुई थी। हालांकि वह फरवरी 2017 में रिटायर हो गए और इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस रेग्युलेशंस की घोषणा सितंबर 2017 में की गई थी। ईईसी का गठन फरवरी 2018 में हुआ और इस साल अप्रैल से प्रजेंटेशंस की शुरुआत हुई। 1979 बैच के आईएएस अधिकारी ओबरॉय ने मार्च 2018 के बाद रिलायंस के साथ नया सफर शुरू किया था। हालांकि इस मुद्दे पर रिलायंस ने ईटी के सवालों के जवाब नहीं दिए।

जियो इंस्टीट्यूट को लेकर उठे सवाल

मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय की ओर से जारी छह उत्कृष्ट संस्थानों सूची में रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्टीट्यूट को शामिल करने के फैसले पर सोशल मीडिया पर आम लोगों ने सवाल उठाए। लोगों ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने किस आधार पर एक ऐसे संस्थान को इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सेलेंस की सूची में शामिल किया जो अभी कागज पर ही है। दरअसल इस जियो इंस्टीट्यूट का नाम भी पहले नहीं सुना गया और इंटरनेट पर भी इसका अस्तित्व नहीं दिख रहा है।

सरकार की ओर एक ‘बिना अस्तित्व’ वाले कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थान में शामिल करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार जियो इंस्टीट्यूट रिलायंस का एक संस्थान है, लेकिन अभी तक इस संस्थान ने काम करना शुरू नहीं किया है। हालांकि गूगल पर ढूंढने पर भी इस इंस्टीट्यूट के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल पा रही है। सिर्फ हमें ही नहीं मंत्रालय को भी इसकी कोई तस्वीर न मिल सकी तो इस ऐलान वाले तस्वीर में रिलायंस फाउंडेशन के पोस्टर से काम चलाना पड़ा।

इतना ही ट्विटर पर भी इस संस्थान का कहीं भी उल्लेख नहीं मिलता। खुद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी इन संस्थानों का नाम घोषित करते हुए जियो इंस्टीट्यूट का कोई ट्विटर हैंडल नहीं मिला और उन्हें भी ऐसे ही इसका नाम लिखना पड़ा। बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने ट्वीट कर में मणिपाल यूनिवर्सिटी और बिट्सपिलानी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ जियो इंस्टीट्यूट को भी बधाई दी थी।

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