मध्य प्रदेश: नोट बदलवाने की जद्दोजहद में, बैंक की लंबी लाइन में खड़े रिटायर्ड कर्मी की हार्ट अटैक से मौत

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नोटबंदी के बाद नए नोट लेने की मची अफरातफरी में जनता अव्यवस्थाओं के बीच पिस रही है । चारो तरफ से एटीएम की लाईन में खड़े होने से मरने की खबरे आ रही हैं शनिवार को नए नोट लेने के लिए बैंकों में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ के बीच महाराष्ट्र और केरल में हुई अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई।

सुबह से खाली पेट बैंक पहुंच रहे लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। अतिरिक्त काउंटरों की कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकांश जगह एक ही लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।

इस मारामारी के कारण मध्य प्रदेश का एक मामला सामने आया है जिसमें एक रिटायर्ड कर्मी को हार्ट अटैक से मौत हो गई।

500-1000 के पुराने नोट बदलने की जद्दोजहद में मध्य प्रदेश के सागर में एक रिटायर्ड कर्मी को हार्ट अटैक आ गया। वह करीब 30 मिनट बैंक के बाहर पड़ा रहा। हैरानी की बात यह है कि बैंक की लाईन में खड़े लोग अपनी लाईन में ही खड़े रहे कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।

मध्य प्रदेश

मप्र के सागर में मकरोनिया क्षेत्र में यूनियन बैंक में शनिवार को सुबह रिटायर्ड अकाउंटेंट विनोद कुमार पांडे 4000 रुपए के 500-1000 के नोट लेकर उन्हें चेंज कराने पहुंचे थे।

बैंक  फर्स्ट फ्लोर पर स्थित है। नीचे लंबी लाइन लगी थी। पांडे काफी देर तक लाइन में खड़े रहे। अचानक उन्हें चक्कर आए और वे गिर पड़े। कुछ लोगों ने फौरन 100 डॉयल और 108 को कॉल किया, लेकिन 30 घंटे तक इंतजार के बावजूद दोनों में से कोई नहीं पहुंचा।
करीब 12.30 बजे उन्हें निजी वाहन से समीप के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाय नहीं जा सका। पांडे को जमीन पर बेसुध पड़े देखने के बावजूद ज्यादातर लोगों ने लाइन छोड़कर उनकी मदद करने की इंसानियत नहीं दिखाई।
सुबह से ही एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारे देखने को मिली, घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी लोग मनमुताबिक कैश नहीं निकाल पा रहे हैं। शुक्रवार से एटीएम शुरू होने के कारण लोगों ने राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश जगह एटीएम में कैश ही नहीं डाला गया। वहीं, कुछ एटीएम तो पिछले 3 दिनों से बंद पड़े हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 8 नवंबर की मध्य रात्रि से पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को बंद करने का फैसला किया था। इन नोटों को बदलवाने के लिए कई प्रकार के कदमों की घोषणा की थी, जिससे लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े।

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