PM मोदी की रैली में खाली पड़ी कुर्सियों वाला वीडियो हुआ वायरल, जानिए क्या है सच्चाई?

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भुज, सौराष्ट्र और सूरत में रैलियों को एक के बाद एक लगातार संबोधित कर रहे है। इस बीच उनके राजनीतिक विरोधियों की और से एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें खाली पड़ी कुर्सिया दिखाई देती है।

PM मोदी ने सोमवार को भी राजकोट में एक चुनाव रैली को संबोधित करते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहते हुए अपने समय के दौरान गुजरात के विकास की बात को दरकिनार करते हुए केवल गुजराती गौरव पर बात की थी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी पर दोषारोपण किया था।

इस मौके पर उनके कई राजनीतिक विरोधियों ने, खासकर कांग्रेस ने भी मोदी की रैलियों से गायब भीड़ और खाली जगहों के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जिसका मतलब निकलता है कि 22 वर्षों के लिए भाजपा के गढ़ रहे इलाकों में मोदी का करिश्मा अब नदारद हैं।

कांग्रेस के सलमान निजामी ने इस वीडियो पोस्ट किया हैं।

इस पर कुछ भाजपा नेताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थकों द्वारा किए गए दावों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समर्थकों ने मोदी के भाषण के ऑडियो के साथ खाली रैली वाले स्थानों के वीडियो के साथ जोड़ दिया हैं।

भाजपा के उम्मीदवार भरत बोहरा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जसदान में अपनी रैली में 50,000 से ज्यादा लोगों को सम्बोधित किया। लेकिन जसदान से कांग्रेस के उम्मीदवार ने सोमवार को रैलियों की बाबत बात करते हुए बताया कि एनडीटीवी ने कहा कि बोगरा के दावों में कोई सच्चाई नहीं है, उन्होंने कहा कि इन रैलियों में केवल 6,000 लोग प्रधानमंत्री सुनने के लिए जमा हुए थे।

उन्होंने कहा, “यह एक फ्लॉप शो था। केवल 6,000 समर्थक वहां इकट्ठे हुए, हालांकि भाजपा ने दावा किया था कि वह 50,000 लोगों की भीड़ जमा करेंगें। जबकि डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट कहती है कि मोदी की रैली के दौरान मैदान लोगों से भरा होना चाहिए था, खासकर जब एक प्रधानमंत्री रैली को सम्बोधित करे और वो भी नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री रैली को संबोधित करने आए।

लेकिन दुर्भाग्य से, यह भी आधा भरा नहीं था और यह भीड़ में उन लोगों की तादात की तुलना में केवल एक साधारण संख्या में थी। जबकि सौराष्ट्र में के पटेल-प्रभुत्व का दबदबा है और यहां पास ही गायत्री मंदिर मैदान में दृश्य इसके उलट था।

यह रिपोर्ट आगे बताती है कि हालांकि यह बात आम नहीं है कि इतने बड़े मैदान को लोगों से भरना किसी भी उम्मीदवार के पसीने छुड़ा सकता है। खासकर जब भीड़ जिले के पांच अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में से हो।

पुलिस का सीआईडी अनुभाग, जो सुरक्षा और अन्य कारणों के लिए मतदान के बारे में सरकार के लिए रिपोर्ट तैयार करता है, का सुझाव है कि जसदान में मोदी को देखने के लिए करीब 7,000 लोग उपस्थित थे और धारी में लगभग 10,000 लोग ही जमा थे।

कई रिपोर्टों ने संकेत दिया है कि बीजेपी के खिलाफ विरोधी असंतुलन की वजह पटेल औरपरंपरागत बीजेपी वोट बैंक का खिसकना है। जो अधिकांशत सब जगह देखा जा रहा है। क्योंकि खुले तौर पर भगवा पार्टी के 22 साल की सरकार को खत्म करने का वायदा विपक्ष कर रहा है।

पाटीदार आंदोलन का चेहरा हार्दिक पटेल ने अपने समुदाय के सदस्यों से भाजपा के लिए वोट नहीं देने का आग्रह किया है, भले ही पार्टी ने उनके पिता को मैदान में उतारा हो। गुजरात में उनका रोड शो और रैलियों में काफी अधिक भीड़ जमा हुई थी जो प्रधानमंत्री मोदी के आकर्षण से कहीं अधिक थी।

बीजेपी के खिलाफ गुस्से का शिकार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कई बार अपने कार्यक्रमों में करना पड़ा है। इसलिए वह गुजराती मतदाताओं से परेशान होकर काफी लंबी दूरी से एक चुनाव रैली को संबोधित करते हुए दिख रहे हैं। पूर्व में अमित शाह के कई कार्यक्रम में इसी प्रकार से भीड़ द्वारा बाधा उत्पन होती देखी गई है।

 

 

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