“सालों से गुजरात वासियों के ऊपर विभिन्न रंगों में विद्यमान रहा “मोदी मैजिक” इस बार बेरंग होता नजर आ रहा है”

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गुजरात में विधानसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प है, केवल गुजरात की नहीं पूरे देश की नजर इन चुनावों पर टिकी हुई है, गौरतलब है कि क़रीब 2 दशकों से गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का राज है, लेकिन इस बार सालों से कायम ये सियासी रुख बदलता नजर आ रहा है, जिसका एक बड़ा कारण 22 सालों से चल रहे ‘मोदी मैजिक’ का फ़ीका पड़ना भी माना जा रहा है।

PHOTO: (MARK SCHIEFELBEIN/AFP/Getty Images)

अब अगर बात करें इस ‘मोदी मैजिक’ की तो बीते दिनों में हुए ऐसे कई वाक्ये हैं जो इसके विफल होने की गवाही देते हैं। एक समय में श्रोताओं की भीड़ से भरी रहने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां अब खाली दिखाई देने लगी हैं, उदाहरण के तौर पर ले तो हाल ही में पीएम मोदी ने सौराष्ट्र के जसदण में चुनावी रैली की थी, इस सभा में ज्यादातर कुर्सियां खाली रह गईं।

इतना ही नहीं भरूच, जूनागण और सूरत आदि में भी उम्मीद के मुताबिक भीड़ जुटती नहीं देखी गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर जमकर लोगों द्वारा इस पर तंज कसे गए की पीएम मोदी की रैली में खाली पड़ी कुर्सियां लोगों के बदलते मूड का संकेत दे रही हैं। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी के रोड शो को भी लोगों ने सिरे से खारिज कर दिया था, साथ ही खबर आई थी की लोगो से ज्यादा सड़क पर पीएम के सुरक्षाकर्मी तैनात थे।

वायरल हुई ABP न्यूज़ संवाददाता जैनेन्द्र कुमार की रिपोर्ट, गुजरात में BJP प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी रैलियों में कुर्सी नहीं भर पा रही है, विधानसभा में 150 कुर्सी कैसे भरेगी?(जम्बुसर, भरूच की तस्वीर)

Posted by Rifat Jawaid on Sunday, 3 December 2017

तो वहीं दूसरी तरफ सूरत में हुए पाटीदार नेता हार्दिक पटेल रोड शो की अगर बात करे तो यहां लगे जमावड़े ने PAAS (पाटीदार अनामत आंदोलन समीति) की ताक़त का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया। किसी भी चुनाव में लोगों के रुझान को जानने के लिए कराये गए सर्वे अहम भूमिका निभाते है, इसी प्रकार- गुजरात चुनावों के तहत हुए CSDS के ओपिनियन पोल (सर्वे) की मानें तो इस सर्वे में कांग्रेस को बहुत तेजी से आगे बढ़ते हुए और गुजरात में सत्तारूढ़ बीजेपी के काफी करीब आते बताया गया।

इसके साथ ही यह भी कहा गया कि बीते अगस्त और अक्टूबर के दो सर्वेक्षणों की तुलना में इस सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच लोकप्रियता का अंतर घटा है। ज्यादातर सर्वे एजेंसियों को लेकर यह माना जाता है की इन सर्वे द्वारा मुख्यत: सत्तारूढ़ पार्टी को लेकर सकारात्मक रुझान दर्शाए जाते है, लेकिन इस बार इनका भी बीजेपी की स्थिति को कमज़ोर बताना, सियासी पलटवार के होने वाले दावों को ही दर्शाता है।

PHOTO: @INCIndia

बेशक इस सर्वे के निष्कर्षो को बीजेपी ने ‘यथार्थ से परे’ बताते हुए खारिज कर दिया, लेकिन कांग्रेस ने यह कहते हुए सर्वे के निष्कर्षो का स्वागत किया है कि इस बार गुजरात के मतदाताओं ने पहले ही बीजेपी को सरकार से बाहर करने के लिए वोट करने का फैसला कर लिया है जिसे राहुल गांधी की रैलियों में दिख रहे इस बार के खासे उत्साह से भी आंका जा रहा है, साथ ही उनकी सवालों वाली सीरीज भी लोगों का ध्यान कांग्रेस की ओर आकर्षित करने में बखूबी सफल नजर आई है।

तो वहीं दूसरी ओर इसके ठीक उलट ‘मोदी मैजिक’ का मुख्य तथ्य माने जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से लेकर बीजेपी के सभी नेताओं तक के भाषणों में जरुरी चिंतन के मुद्दों से भटकाव नज़र आया और साथ ही गुजरात से जुडी कोई ठोस परियोजना या विकास का कोई नया मूल मंत्र भी इन भाषणों में नजर नहीं आया, जिसके चलते गुजरात के पाटीदार, ओबीसी समुदाय या दलित मतदाता बीजेपी के पाले में आ पाते।

इन गुजरात चुनावों में बीजेपी की पकड़ पर ध्यान दे तो उनके पास लाइफलाइन के तौर पर इस्तेमाल किये गए- राम मंदिर मामले और मणि शंकर अय्यर की टिप्पणी जैसे मामले (जिनका गुजरात से वास्तव में कुछ लेना देना नहीं है) के आलावा कोई ठोस विकल्प अभी तक देखने को नहीं मिला है। हमेशा से तुरुप के इक्के के तौर पर इस्तेमाल किए गए मोदी जी के गरीबी और चाय बेचने के हवाले भी इस बार निश्चय ही कारगर साबित नहीं हुए, जिसका आभास मैंने हाल ही में की गई अपनी गुजरात यात्रा के दौरान किया।

गुजरात में सियासी शह और मात के खेल के बीच ही मैंने सूरत में कुछ हीरा व्यापारियों से बातचीत की और पूछा की क्या आप बीजेपी को वोट करेंगे तो उनका जवाब था– मैं 2019 में मोदी को वोट करूंगा, लेकिन इस बार उन्हें सबक सीखाना ठीक उसी प्रकार आवश्यक है जिस तरह एक तेज़ रफ़्तार में चल रही गाड़ी को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता होती हैं। ठीक इसी प्रकार का रुझान गुजरात के अन्य व्यापारियों एवं किसानों के बीच भी देखने को मिला।

प्रमाण के तौर पर ले तो, हाल ही में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का एक ऑडियो टेप लीक हुआ जिसमें वो बीजेपी की कमजोर स्थिति का जिक्र करते हुए कहते हैं कि ‘गुजरात में इस बार बीजेपी की हालत बहुत ही पतली है’, जो सभी बातों की पुष्टि कर देता है और जिसके बाद यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा की सालों से गुजरात वासियों के ऊपर विभिन्न रंगों में विद्यमान रहा “मोदी मैजिक” इस बार बेरंग होता नजर आ रहा है।

(डॉक्टर मेराज हुसैन एक राजनीतिक चिंतक, विचारक, रणनीतिकार एवं ग्लोबल स्ट्रैटिजी ग्रुप के फाउंडर चेयरमैन हैं। इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य या व्यक्त किए गए विचार ‘जनता का रिपोर्टर’ के नहीं हैं)

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