हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद IFFI में नहीं दिखाई गई ‘एस दुर्गा’, डायरेक्टर बोले- ‘जो पसंद नहीं उसे तबाह कर सकती है मोदी सरकार’

0

केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी मलयाली फिल्म ‘एस दुर्गा’ को गोवा में आयोजित 48 वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI 2017) के आखिरी दिन मंगलवार (28 नवंबर) को भी नहीं दिखाया गया। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी ) ने नियमों के उल्लंघन को लेकर फिल्म के पुन: परीक्षण का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सेंसर बोर्ड ने इवेंट खत्म होने से कुछ घंटे पहले फिल्म को रिजेक्ट कर दिया।समापन समारोह से एक घंटे पहले ‘एस दुर्गा’ के निर्देशक सनल कुमार शशिधरण को पत्र जारी किया गया। उन्हें महोत्सव के निदेशक सुनीत टंडन से भी एक पत्र मिला, जिन्होंने उन्हें सूचित किया कि फिल्म को तब तक प्रदर्शित नहीं होने दिया जाएगा जब तक सेंसर प्रमाणपत्र का मुद्दा सुलझ नहीं जाता। इससे पहले फिल्मोत्सव में सोमवार रात ज्यूरी को फिल्म के सेंसर बोर्ड से मंजूर संस्करण को दिखाया गया।

इसके बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने निर्माताओं को पत्र लिखकर फिर से जांच के लिए फिल्म सौंपने को कहा है। पहले फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र दिया गया था। दरअसल, विवाद का विषय हैशटैग जान पड़ता है जो इस फिल्म के संशोधित शीर्षक में ‘एस’ के बाद आया है। पहले फिल्म का नाम ‘सेक्सी दुर्गा’ था, बाद में इसका शीर्षक बदलकर सिनेमाघरों में ‘एस दुर्गा’ के नाम से रिलीज करने का फैसला किया गया।

सीबीएफसी ने अब कहा है कि फिल्म के शीर्षक में बदलाव कर ‘सेक्सी दुर्गा’ से ‘एस दुर्गा करने’ और इसके बाद ‘एस (फिर तीन हैशटैग के चिन्ह) दुर्गा’ किए जाने में समस्या है। सीबीएफसी द्वारा फिल्म के निर्माता शाजी मैथ्यू को भेजे पत्र में कहा गया है कि, ऐसा जान पड़ता है कि प्रथम दृष्टया जानबूझकर सिनेमेटोग्राफ (प्रमाणन) नियमावली का उल्लंघन किया है।

पत्र के अनुसार, सेंसर बोर्ड को गोवा में फिल्मोत्सव ज्यूरी से फिल्म के शीर्षक को लेकर शिकायतें मिली हैं। निर्देशक ने ‘एस दुर्गा’ दिखाई थी, जिसके बारे में बोर्ड का कहना है कि उसका बिल्कुल भिन्न असर होगा और यह शीर्षक पंजीकरण व तत्पश्चात किए गए बदलाव की बुनियाद को कम करने की कोशिश है। आपको बता दें कि यह एक मलयालम फिल्म है। इसके निर्देशक सनल कुमार शशिधरन हैं।

‘जो पसंद नहीं उसे तबाह कर सकती है मोदी सरकार’

अपनी फिल्म ‘एस दुर्गा’ के आईएफएफआई में प्रदर्शित न हो पाने से हतोत्साहित निर्देशक सनल कुमार शशिधरन ने कहा कि इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता में रहने वाले उन चीजों को नष्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं जो उन्हें पसंद नहीं हैं। आईएफएफआई के खत्म होने के एक दिन बाद बुधवार को शशिधरन ने फेसबुक पर लिखा है, “मैं बिलकुल भी नाखुश नहीं हूं। बल्कि, मैं खुश हूं कि मेरी फिल्म ने उन बहुत सारे लोगों को यह समझने में मदद की है जो पूछते हैं कि अगर संघ सत्ता में आ जाता है तो क्या समस्या है?”

उन्होंने कहा कि, “यह साबित हो गया है कि जो सत्ता में हैं, वे किसी भी उस चीज को नष्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं जो उन्हें पसंद नहीं है।” शशिधरन ने आगे कहा है, “वे अपने मतलब के लिए कानून का दुरुपयोग कर सकते हैं या न्यायपालिका को अनदेखा कर सकते हैं। वे अपने सहयोगियों को आश्वासन दे सकते हैं कि उनके साथ कुछ भी नहीं होगा भले ही वे अदालतों का पालन न करें। वास्तव में यह एक बहुत ही खतरनाक संदेश है।” उन्होंने कहा कि, “मैंने कई लोगों को देखा जो खुले तौर पर स्वीकारते हैं कि वे इस सरकार के समर्थक हैं लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में मंत्रालय के मेरी फिल्म के खिलाफ खेले गए खेल से बहुत निराश और दुखी हैं।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here