राफेल मुद्दा: मोदी सरकार कैग रिपोर्ट, पीएसी संबंधित पैरा में संशोधन की मांग को लेकर पहुंची सुप्रीम कोर्ट

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राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी यह मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने CAG (कॉम्पट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट को आधार बनाकर हमले शुरू कर दिए हैं। इसी बीच, केंद्र सरकार ने शनिवार (15 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर शीर्ष न्यायालय के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है। सरकार ने कहा है कि उसके नोट की अलग-अलग व्याख्या के कारण विवाद पैदा हो गया है।

राफेल

केंद्र ने अपनी याचिका में कहा है कि फैसले के पैराग्राफ 25 में दो वाक्य लगता है कि उस नोट पर आधारित है जिसे उसने मुहरबंद लिफाफे में मूल्य विवरण के साथ जमा किया था लेकिन अदालत द्वारा इस्तेमाल किये गए शब्द से अलग मतलब निकाला जा रहा है। केंद्र ने साफ कर दिया कि वह यह नहीं कह रहा कि कैग रिपोर्ट का पीएसी ने परीक्षण किया था या संपादित हिस्से को संसद के सामने रखा गया। उसने स्पष्ट किया कि नोट में कहा गया है कि सरकार कैग के साथ मूल्य विवरण को साझा कर चुकी है। यह वाक्य भूतकाल (पास्ट टेन्स) में लिखा गया है और यह ‘‘तथ्यात्मक रूप से सही’’ है।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि उक्त नोट मोटे अक्षरों में लिखा गया है। इसमें मोटे अक्षरों में लिखे गए वाक्य में कहा गया है कि सरकार मूल्य विवरणों को कैग के साथ साझा कर चुकी है। कैग की रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद में रखा गया और यह सबके सामने है। याचिका के मुताबिक शब्द ‘हैज बीन (हो चुका है)’ भूतकाल में इस्तेमाल हुआ है जिसके बारे में लिखा है कि सरकार कैग के साथ मूल्य विवरण को पहले ही साझा कर चुकी है। यह भूतकाल में है और तथ्यात्मक रूप से सही है। वाक्य के दूसरे हिस्से में पीएसी के संबंध में है। इसमें कहा गया है कि कैग की रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। फैसले में ‘इज’ की जगह ‘हैज बीन’ का इस्तेमाल हुआ है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत के आदेश में आवश्यक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि इसी तरह फैसले में यह कथन है कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया। इस बारे में कहा गया कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया और यह सार्वजनिक है। याचिका के मुताबिक, नोट में केंद्र की ओर से यह कहा गया है कि कैग रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। यह प्रक्रिया की व्याख्या है जो आम तौर पर अपनायी जाती है लेकिन फैसले में अंग्रेजी में ‘‘इज’’ यानि ‘‘है’’ की जगह ‘‘हैज बीन’’ अर्थात ‘‘कर चुकी है’’ का इस्तेमाल हुआ है।

सरकार ने ऐसे वक्त याचिका दायर की है जब विपक्षी कांग्रेस और अन्य ने मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और सरकार पर कैग रिपोर्ट को लेकर शीर्ष न्यायालय को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। मोदी सरकार को बड़ी राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया से ‘‘संतुष्ट’’ है। शीर्ष अदालत ने जांच की मांग खारिज कर दी जिसके बाद इस फैसले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उसे फ्रांस से 36 विमान खरीदने के ‘‘संवेदनशील मुद्दे’’ में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं लगता।

शनिवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य देने के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है। कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य पेश करने के लिए सरकार जिम्मेदार है। लगता है कि अटॉर्नी जनरल को पीएसी के सामने बुलाया जाना चाहिए और उनसे पूछा जाना चाहिए कि आखिर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट गलत तथ्य क्यों पेश किए। यह काफी गंभीर मामला है।

कपिल सिब्बल ने आगे कहा, हम बहुत स्पष्ट हैं कि सुप्रीम कोर्ट एक उचित फोरम नहीं था जिस पर इन मुद्दों का फैसला किया जा सकता है, क्योंकि यहां न तो सुप्रीम कोर्ट न ही फाइलों की जांच कर सकता है और न ही गवाहों के शपथपत्र की जांच कर सकता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री को बुलाकर पूछताछ भी नहीं कर सकता, जबकि हमें पीएम से सवाल करने की जरूरत है।

कांग्रेस नेता और PAC के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला कि सीएजी रिपोर्ट सदन में पेश की गई और पीएसी के सामने भी, इसके बाद पीएसी ने इसकी जांच की। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा कि ये जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद है। तो सरकार बताए कि ये जानकारी कहां मौजूद है? क्या आपने इसे देखा है?

साथ ही कांग्रेस नेता ने कहा, ‘मैं इस मामले को PAC के दूसरे सदस्यों के समक्ष उठाने जा रहा हूं। हम AG (अटर्नी जनरल) और CAG को भी तलब करेंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने धोखे से काम किया है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन वह जांच एजेंसी नहीं है। ऐसे में हम राफेल डील पर JPC की मांग पर अड़े हुए हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर बीजेपी सांसद सुब्रामण्यम स्वामी ने कहा कि, अगर PAC चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट नहीं मिली है तो हमें उनकी बात को गंभीरता से लेना चाहिए, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना चाहिए या रिव्यू पेटीशन दायर करनी चाहिए।

बता दें कि एक दिन पहले यानी शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस पर सरकार को घेरने की कोशिश की थी। बता दें कि शुक्रवार को राफेल डील की जांच को लेकर दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था और कहा था कि इस डील में कोर्ट को कोई कमीं नजर नहीं आती है।

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