सुरक्षाबलों की फायरिंग में 2 युवाओं के मारे जाने के विरोध में हड़ताल से कश्मीर में जनजीवन प्रभावित, कई हिस्सों में इंटरनेट सेवा हुई बंद

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जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सेना के जवानों की ओर से चलाई गई गोली में दो युवाओं के मारे जाने के विरोध में अलगाववादियों की हड़ताल से रविवार (28 जनवरी) को जनजीवन प्रभावित रहा। न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि हड़ताल के मद्देनजर श्रीनगर के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध लगाया गया है और चार जिलों मे इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

Photo: NDTV

कश्मीर घाटी के अधिकतर हिस्सों में दुकानें एंव व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं, वहीं सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारत है।उन्होंने कहा कि शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में निजी कारें सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। बता दें कि शोपियां के गानोवपुरा में शनिवार (27 जनवरी) पथराव कर रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सेना की ओर से चलाई गई गोली में दो युवक मारे गए थे और कई घायल हो गए थे।

भाषा के मुताबिक, स्थानी निवासियों का आरोप है कि सेना के जवानों ने हल्के उकसावे पर गोलियां चलाईं, लेकिन सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पथराव में अनेक जवानों के घायल होने और वाहनों को नुकसान पहुंचने के बाद आत्मरक्षा के लिए जवानों को गोली चलानी पड़ी। सेना का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें 20 साल के जावेद अहमद और 24 साल के सुहैल की मौत हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि सफाकदाल, खनयार, नौहट्टा, रैनावाड़ी और एमआर गंज पुलिस थाना क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। वहीं, मैसूमा और क्रालखुद पुलिस थाना क्षेत्र के कुछ भागों में भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहीं पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम, और शोपियां जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है और घाटी में इसकी स्पीड घटाकर 128 केबीपीएस कर दी गई है।

इस घटना से गुस्साईं जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से बात की और कहा कि हर एक नागरिक की मौत पर घाटी में चल रही शांति वार्ता को झटका लगता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

 

 

 

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