मेवात की निर्भया पर इतनी खामोशी क्यों? क्योंकि मुस्लिम हैं?

1

16 दिसम्बर, कौन भूल सकता है भला ये दिन जब राजधानी दिल्ली में गैंगरेप हुआ था, जी हाँ हम निर्भया रेप केस की बात कर रहे हैं। ये वही 16 दिसम्बर का दिन था की दिल्ली कि रफ़्तार रूक गयी थी।

मुझे आज भी याद है कि लाखों की तादाद में कैसे धर्म से ऊपर उठ कर इस मुल्क के लोगों ने मिल कर आवाज़ उठायी थी, धरने दिये थे, उसे इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष किया था, रातों रातों जग कर, भूखे रह कर इंसाफ़ की जंग लड़ी थी और यूं निर्भया देश की बेटी कहलाई।

निर्भया को हक़ दिलाने के लिए लोगों ने पुलिस से हाथा-पाई तक किया, मुझे ये भी याद है कि कैसे जंतर मंतर पर मेरे रिपोर्टर मित्र के पैर तक टूट गए उस स्टोरी को कवर करते वक़्त या ऐसे बहुत सारे लोग थे जिनको चोटे आयीं।

लेकिन क्या आपको ये भी याद है निर्भया कि तरह हरियाणा के मेवात जिले के गांव डिंगरहेड़ी में 24 तारीख़ को जो हैवानियत हूई, जिस तरह से मामा-मामी के सामने भांजियों का सामूहिक बलात्कार किया गया फिर मामी की छाती को काट दिया गया और दोनों को मौत के घाट उतार दिया गया।

Also Read:  Haryana govt to take out rath yatra as part of Golden Jubilee

क्या इस घटना ने निर्भया की तरह आपके ज़मीर को नहीं झकझोरा? क्या राजधानी दिल्ली से लेकर देश के किसी कोने में कोई ऐसा शख्स नहीं था जिसके इस घटना को सुनकर रोंगटे खड़े हो गए हों?

आखिर ऐसी क्या वजह है कि चैनलों पर इस दिल को दहला देने वाली हत्या को नहीं दिखाया गया? ना ही देश के प्रतिष्ठित एंकरों ने अपने प्राइम टाइम डिबेट में इस मुद्दे पर चर्चा की। ताज्जुब की बात तो ये भी है कि ना ही इस देश के नौजवानों ने कैंडल मार्च या धरना प्रदर्शन किया।

आप ये जानकर हैरान हो जायेंगे कि पुलिस पर आरोपियों को बचाने का इल्जाम लग रहा है। मेवात बार एसोसियेशन ने आरोप लगाया है कि जिस पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एक दिन पहले तक भी 302 धारा नहीं लगाई गई थी उससे इस केस में इंसाफ दिलाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

Also Read:  नोटबंदी के बावजूद शिरडी के साईं बाबा को मिला 31 करोड़ का दान

राव इंद्रजीत सिंह गुड़गांव से सांसद हैं। देश के रक्षा राज्य मंत्री भी हैं। इनके क्षेत्र के तावड़ू कस्बे में निर्भया की तरह मुस्लिम नाबालिग लड़कियों का गैंगरेप होता है। हैवान महिला का गैंगरेप के बाद प्राइवेट पार्ट भी काट देते हैं। विरोध करने पर मामा और मामी को जान से मार देते हैं। पूरे परिवार को पीट पीटकर अधमरा कर देते हैं। घटना 24 अगस्त की है। लेकिन राव साहब के पास फुरसत नहीं है कि वह जाकर पीड़ितों से मुलाकात कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट के वकील, राजीव यादव ने जनता का रिपोर्टर को बताया, “सीनियर ADGP शत्रूजीत कपूर के निर्देश में एसआईटी का गठन किया गया है पर चौकाने वाली बात तो ये है कि दोषियों को बचने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है और एस घटना को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।”

राजीव यादव ने आगे बताया कि अभी भी आईपीसी की धारा 302 नहीं लगाया गया है जबकि ये सब जानते हैं की मेवात का ये दिल दहला देने वाली घटना कोल्ड ब्लड मर्डर था।

Also Read:  Allahabad High Court orders CBI inquiry into Bulandshahr gangrape case

यादव ने आगे बताया कि नूह के विधायक ज़ाकिर हुसैन ने विधानसभा में इस  घटना को उठाया वहीँ कुछ लोग उन्हें यादव होने की से उन गुनहगारों को बचा रहे हैं और उन्हें पनाह भी दे रहे हैं।

ये है कड़वा सच महिलाओं पर होने वाले अत्त्याचारों पर भारतीय मीडिया के दोगलेपन का, हमारे दोहरे मापदंड का और महिलाओं को इन्साफ दिए जाने के ढोंग पर हमारी सच्चाई का।

शर्म की बात है कि यही टीवी एंकर्स बुलंदशहर के बलात्कार पर कई दिनों तक अखिलेश सरकार को घेरते रहे जो की उचित भी था, लेकिन मेवात की घटना पर मानो उनको सांप सूंघ गया हो।

सिर्फ थोड़े समय के राजनितिक लाभ के लिए अगर आप आज मेवात की बेटियों पर होने वाले ज़ुल्म पर खामोश हैं तो जान लीजिये, इस हैवानियत का शिकार कल कोई भी हो सकता है। वो आपका अपना भी हो सकता है।

इंसानियत के भक्षक अपनी हवस की आग बुझाने से पहले पीड़ित का धर्म नहीं पूछते।

 

 

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here