कराची हमला: इस महिला पुलिस अधिकारी की बहादुरी पर फिदा हुआ पूरा पाकिस्तान, अफसर ने जान पर खेलकर बचाई चीनी कर्मचारियों की जान

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पाकिस्तानी महिला पुलिस अधिकारी सुहाई अजीज तलपुर की बहादुरी पर पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया फिदा हो गई है।
सुहाई पाकिस्तान की सिंध पुलिस में सहायक अधीक्षक हैं। उन्होंने 23 नवंबर को पाकिस्तान के कराची स्थित चीन के वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले के दौरान सुरक्षा ऑपरेशन का नेतृत्व किया और अपनी समझदारी और बहादुरी की वजह से हमले को नाकामयाब कर दिया। इस बहादुर महिला अधिकारी ने कई चीनी कर्मचारियों और अधिकारियों की जान बचा ली।

जी हां, कभी सुहाई को निजी स्कूल में दाखिला लेने के कारण उसके अपनों ने ही छोड़ दिया था, आज पूरे पाकिस्तान में उसकी तारीफ हो रही है। गांव की यह बच्ची अब कराची पुलिस की महिला अधिकारी बन चुकी है। शुक्रवार को कराची में जब आधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने चीन के वाणिज्य दूतावास पर हमला बोला तो इस बहादुर महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी जान पर खेलकर मिशन के कई स्टाफ की जान बचाई। सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों के इस हमले को नाकाम कर दिया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, महिला अधिकारी सुहाई ने सुनिश्चित किया कि 9 हैंड-ग्रेनेडों, असॉल्ट राइफलों समेत बड़ी मात्रा में विस्फोटकों के साथ आए आतंकी वाणिज्य दूतावास की बिल्डिंग के भीतर डिप्लोमेटिक स्टाफ के करीब न पहुंच सकें। पुलिस ने बताया है कि आतंकियों के पास खाने के सामान और दवाइयां भी थीं, जिससे साफ है कि वे बंधक बनाने के इरादे से आए थे। हालांकि आतंकी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके। जैसे ही वे कांसुलेट के गेट पर पहुंचे, पुलिस की टीम ने पोजिशन लेते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

इस मुठभेड़ में दो पुलिस अधिकारी मारे गए और सभी आतंकियों को ढेर कर दिया गया। सुहाई सिंध प्रांत के तांडो मोहम्मद खान जिले के भाई खान तालपुर गांव के एक निम्न मध्यम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज परीक्षा पास करने के बाद वह पुलिस फोर्स में शामिल हुईं। सुहाई ने अखबार को बताया, ‘जब मेरे माता-पिता ने स्कूल में दाखिला दिलाने का फैसला किया तो हमारे ज्यादातर रिश्तेदारों और परिचितों ने परिवार पर तंज कसना शुरू कर दिया। माहौल ऐसा हो गया कि मजबूर होकर मेरे परिवार को गांव छोड़ना पड़ा और पास के एक कस्बे में शिफ्ट होना पड़ा।’

सुहाई के पिता अजीज तालपुर एक राजनीतिक कार्यकर्ता और लेखक हैं, जो हमेशा अपनी बेटी के बारे में बड़ा सोचते थे। उन्होंने बताया, ‘मेरे रिश्तेदारों ने संबंध खत्म कर लिए, क्योंकि मैं सुहाई को पढ़ाना चाहता था जबकि वे चाहते थे कि उसे सिर्फ धार्मिक तालीम दी जाए। हालांकि मैं अड़ा रहा कि अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाकर रहूंगा।’ सुहाई ने एक निजी स्कूल से अपनी प्राइमरी शिक्षा पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए बहरिया फाउंडेशन जॉइन कर लिया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सिंध के हैदराबाद में जुबैदा गर्ल्स कॉलेज से उन्होंने बी.कॉम किया।

वह कहती हैं, ‘मेरे घरवाले मुझे CA बनाना चाहते थे लेकिन मुझे यह काफी नीरस काम लगता था क्योंकि इसकी सोशल वैल्यू नहीं है इसलिए मैं CSS में शामिल हुआ और पहले ही प्रयास में पास हो गई।’ सुहाई सफलता का श्रेय अपने कठिन परिश्रम और माता-पिता को देती हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे माता-पिता राष्ट्रवादी हैं। बचपन में वे मुझे सिंधी कविता याद करने पर जोर देते थे। इससे साहित्य और इतिहास में मेरी रुचि बढ़ी और परीक्षा में काफी फायदा हुआ।’

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