भूख हड़ताल पर बैठीं मेधा पाटकर को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने पर केजरीवाल ने की निंदा

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सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिए उचित पुनर्वास की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के धार जिले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर (62) और उनके साथ उपवास पर बैठे अन्य लोगों को पुलिस ने 12वें दिन सोमवार(7 अगस्त) को धरना स्थल से जबरन उठा दिया। पाटकर 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी थीं। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों को बीच झड़प हुई।

फाइल फोटो: PTI

सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिए उचित पुनर्वास की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी मेधा पाटकर और उनके साथियों को पुलिस ने 12वें दिन धरना स्थल से उठाकर इंदौर, बड़वानी और धार के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया है।

इंदौर संभाग के आयुक्त संजय दुबे ने कहा कि मेधा एवं अन्य आंदोलनकारियों को प्रशासन ने धरना स्थल से उठा दिया है, क्योंकि उनका स्वास्थ्य खराब हो रहा था। उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी मेधा एवं अन्य लोगों को विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया है।

दुबे ने बताया कि उन्हें अस्पतालों में ले जाया गया है, लेकिन उन जगहों का नाम नहीं बताएंगे जहां उन्हें ले जाया गया है, क्योंकि इससे समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में छह पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं और कई सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। दुबे ने बताया कि धरना स्थल पर अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।

हालांकि, इस बांध के विस्थापितों के लिए संघर्ष कर रही हिम्शी सिंह ने धरना स्थल से बताया कि धरनास्थल पर कुल 12 लोग अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। पुलिस मेधा सहित उपवास पर बैठे छह लोगों को धरना स्थल से बलपूर्वक उठा कर ले गई। इनमें पांच महिलाएं एवं एक पुरूष है।

केजरीवाल ने साधा निशाना

मेधा पाटकर को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिवराज सरकार पर हमला बोला है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘मेधाजी की गिरफ्तारी निंदनीय है, विस्थापितों से संवाद और पुनर्वास जरूरी है, पुलिस करवाई नहीं। विस्थापितों का भी विकास सुनिश्चित हो।’

शिवराज ने दी सफाई

मेधा पाटकर को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, गिरफ्तार नहीं किया गया है। चौहान ने आज ट्वीट कर कहा, मैं संवेदनशील व्यक्ति हूँ. चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर जी व उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, गिरफ्तार नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि मेधा पाटकर और उनके साथियों की स्थिति हाई कीटोन और शुगर के कारण चिंतनीय थी। इनके स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के लिए हम प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार ने नर्मदा पंचाट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन के साथ 900 करोड़ रूपये का अतिरिक्त पैकेज देने का काम किया।

आंदोलनकारियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

हिम्शी ने कहा कि अनशन पर बैठे बाकी दो पुरूष एवं चार महिलाओं सहित छह लोगों को पुलिस धरना स्थल से उठा कर नहीं ले गई। वे अब भी धरनास्थल पर अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन खत्म करने के लिए पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ लोगों को चोटें आई हैं।

इसके अलावा, पुलिस ने धरना स्थल पर बना वह पंडाल भी पूरी तरह से तोड़ दिया है, जिसमें बैठकर हमारा आंदोलन चल रहा था। उन्होंने कहा कि हम इस आंदोलन को जारी रखेंगे। हालांकि, लाठीचार्ज के आरोपों पर प्रक्रिया जानने के लिए पुलिस से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सम्पर्क नहीं हो पाया।

मेधा पाटकर ने साधा पीएम मोदी पर निशाना

धरना स्थल से उठाये जाने से पहले नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने आडियो रिकॉर्ड करके एक संदेश में कहा कि आज मध्यप्रदेश सरकार ने हमारे आंदोलन का जवाब हम सबको मात्र गिरफ्तार करके दिया है। यह कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में गहरे संवाद के लिए जगह नहीं है।मेधा ने इस रिकॉर्ड में कहा कि इसे हम महात्मा गांधी जी के सपनों की हत्या मानते हैं। यह उन लोगों द्वारा किया जा रहा है, जो संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर में आस्था नहीं रखते हैं। समाज इन लोगों को उचित जवाब देगा।

बढ़ता जा रहा है जलस्तर

इधर नर्मदा में सोमवार को जल स्तर 121.90 मीटर पहुंच गया है। 123 मीटर पर खतरे का निशान निर्धारित है।मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार सरदार सरोवर बांध से प्रभावित मध्यप्रदेश के करीब 6,500 परिवार अब भी इस बांध के कैचमेंट इलाके में रह रहे हैं।

हालांकि, नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं का दावा है कि नवागाम के पास गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के गेटों को जून में बंद करने से मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के आसपास रहने वाले धार, बडवानी, अलीराजपुर एवं खरगौन जिलों के 40,000 परिवार डूब की चपेट में आ रहे हैं। इन घरों में करीब तीन लाख लोग रहते हैं। वे बेघर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें 31 जुलाई तक अपने-अपने घरों को छोड़ने को कहा था, लेकिन कई लोग उचित पुनर्वास की मांग को लेकर अपने घर खाली करने को तैयार नहीं हैं और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम तब तक अपने घरों को नहीं छोड़ेंगे, जब तक हमारे लिए उचित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती।

नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार के अधिकारी डूब प्रभावित लोगाें काे अपने स्थान से हटाकर टीन शेड में रहने के लिये बाध्य कर रहे हैं तथा पुनर्वास स्थलाें पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गई हैं। टीन शेड के रूप में बने इन अस्थायी घराें में काेई भी नहीं रह सकता है।

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