35 साल की मैरी कॉम ने 5वीं बार एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

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पांच बार की विश्व चैंपियन भारतीय मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने शानदार प्रदर्शन कायम रखते हुए बुधवार (8 नवंबर) को पांचवी बार एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। मैरी कॉम ने 48 किलो लाइट फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में नॉर्थ कोरिया की हियांग मी किम को एकतरफा 5-0 से हराया। 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली 35 साल की मैरी कॉम करीब एक साल के अंतराल के बाद रिंग में वापसी की है।पांच साल 51 किलो भार वर्ग में भाग लेने के बाद मैरीकॉम 48 किलोवर्ग में लौटी हैं। 48 किलोवर्ग में उनका पहला एशियाई स्वर्ण पदक है। इससे पहले मंगलवार (7 नवंबर) को 35 वर्षीय अनुभवी भारतीय मुक्केबाज ने सेमीफाइनल में जापान की तसुबासा कोमुरा पर 5-0 से बड़ी जीत दर्ज की थी। अपने अनुभव से उन्होंने इस मैच में जापान की मुक्केबाज को आसानी से हरा दिया था।

भारतीय मुक्केबाजी की ‘वंडर गर्ल’ मैरी कॉम ने एशियाई मुक्केबाजी में पांचवीं बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया, जबकि सोनिया लाथेर (57 किलो ) को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मैरी कॉम मैरी कॉम का यह 2014 एशियाई खेलों के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक है और एक साल में उनका पहला पदक है।

विश्व चैम्पियनशिप की रजत पदक विजेता सोनिया को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वह बंटे हुए फैसले में चीन की यिन जोन्हुआ से हार गई। भारत को इस टूर्नामेंट में एक स्वर्ण, एक रजत और पांच कांस्य पदक मिले। मैरी कॉम ने इस जीत के साथ टूर्नामेंट में अपना शानदार रिकार्ड बरकरार रखा है।

वह सभी छह बार फाइनल में पहुंची और बस एक बार रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उसने 2003, 2005, 2010 और 2012 में भी इसमें पीला तमगा जीता था। जबकि 2008 में उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। मैरी कॉम ने अपनी प्रतिद्वंद्वी के हर वार का माकूल जवाब दिया। दोनों ओर से तेज पंच लगाये गए। उन्होंने उसके किसी भी वार से विचलित नहीं हुई और पूरे सब्र के साथ खेलते हुए जीत दर्ज की।

दूसरी ओर सोनिया का मुकाबला काफी थकाने वाला था। जोन्हुआ ने संतुलित जवाबी हमले किये और अच्छे पंच भी लगाये। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने भारतीय टीम खासकर मेरीकाम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैरी कॉम का स्वर्ण भारत की महिला शक्ति की जीत है। तीन बच्चों की मां ने दिखा दिया कि मन में लगन हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। मैं पूरी टीम को बधाई देता हूं।

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