केरल हाईकोर्ट ने कहा, हर अंतर-धार्मिक विवाह को ‘लव जिहाद’ से न जोड़ा जाए

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हर अंतर-धार्मिक विवाह को ‘लव जिहाद’ के चश्मे से देखे जाने को लेकर केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार(19 अ बेहद नाराजगी जताई है। केरल हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि सभी अंतर-धार्मिक विवाह को ‘लव जिहाद’ की नजर से नहीं देखा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने एक हिंदू युवती और एक मुस्लिम युवक के बीच शादी को बरकरार रखा है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, हाईकोर्ट के जज जस्टिस वी चितंबरेश और सतीश निनान की खंडपीठ ने कन्नूर की रहने वाले श्रुति और अनीस हमीद की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हम राज्य में हर अंतर-धार्मिक विवाह को लव जिहाद या घर वापसी की नजर से देखे जाने के ट्रेंड को देखकर भयभीत हैं। ऐसा तब किया जा रहा है जब पति-पत्नी के बीच शादी से पहले निःस्वार्थ प्रेम रहा हो।

साथ ही हाईकोर्ट ने लता सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार मामले में 2004 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया जिसमें अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। श्रुति और अनीस की शादी को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हम सचेत करते हैं कि सभी अंतर-धार्मिक विवाह को धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि हमें इस कारण धार्मिक सौहार्द को नहीं बिगाड़ना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस मामले में युवती के परिवार वालों ने इसे ‘लव जेहाद’ करार दिया है। दरअसल, श्रुति ने 16 मई को एक मुस्लिम युवक के साथ अपना घर छोड़ दिया था। परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हरियाणा के सोनीपत से खोज निकाला था।

शुरुआत में निचली अदालत ने युवती को उसके माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी थी। इसके बाद युवती के परिवार वालों ने उसे एक योग केंद्र में भर्ती करवाया, जिससे कि वह मुस्लिम युवक को भूल जाए। इसके बाद हाईकोर्ट में युवती ने आरोप लगाया कि योग केंद्र में उसे प्रताड़ित किया गया। मामले की अदालत में चल रही सुनवाई के बीच युवक और युवती ने शादी कर ली। खंडपीठ ने युवती की हिम्मत की दाद देते हुए उसकी शादी को बररार रखा है।

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