मनोहर पर्रिकर ने गोवा की राजनीति में वापसी के सवाल को टालते हुए कहा, जब वक्त आएगा तब देखा जाएगा

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रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भाजपा के विधानसभा चुनाव में जीतने पर गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर संभावित वापसी के सवाल को टालते हुए शुक्रवार को कहा, ‘जब ऐसा होगा तब देखा जाएगा’। इससे एक दिन पहले, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की टिप्पणी से इस बाबत अटकलें शुरू हुई थीं।

गोवा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के रूप में राज्य में वापसी की संभावना के बारे में पूछे जाने पर पर्रिकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं केवल यह कह सकता हूं कि जब समय आएगा तब देखा जाएगा।

नितिन गडकरी जी ने जो कहा है हम वही कहना चाहते हैं’. वह आगामी चुनाव के लिए नामांकन दायर करने जा रहे भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ कुनकोलिएंकर के साथ थे. सिद्धार्थ पणजी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनने से पहले इस सीट से पर्रिकर विधायक रहे थे।

गडकरी ने कल यहां पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि अगला मुख्यमंत्री निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा एक लोकतांत्रिक तरीके से चुना जाएगा।

राजनीतिक अटकलों को जन्म देते हुए उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, ‘वह नेता निर्वाचित प्रतिनिधियों में से हो सकता है या केन्द्र से (किसी को) भी भेजा जा सकता है’। पर्रिकर और कैबिनेट में उनके सहयोगी श्रीपद नाईक तटीय राज्य से आते हैं। बार-बार पूछे जाने के बावजूद कल गडकरी ने यह नहीं बताया कि वह उनमें से किस के बारे में संकेत दे रहे हैं।
नाईक ने कहा कि अगर पार्टी कहती है तो वह अपने गृह राज्य में सरकार की अगुवाई करने को तैयार हैं. बहरहाल, उन्होंने स्पष्ट किया कि न उन्होंने न ही पर्रिकर ने पार्टी से राज्य विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने को कहा है। नाईक लोकसभा में उत्तर गोवा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भाषा की खबर के अनुसार, आयुष मंत्री से जब गडकरी की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैंने इस के लिए नहीं कहा है और मनोहर पर्रिकर ने भी इसके लिए नहीं कहा है’नाईक ने कहा, ‘अगर पार्टी जिम्मेदारी देती है तो मैं मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने को तैयार हूं’. जैसा आप जानते हैं हम (मैं और पर्रिकर) पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं. हम हर उस जिम्मेदारी को संभालेंगे जो पार्टी देगी, लेकिन हमने पद के लिए नहीं कहा है’. उन्होंने कहा कि गडकरी का मतलब यह था कि विकल्प खुले हैं।

ऐसी भी स्थिति हो सकती है जिसमें मौजूदा मुख्यमंत्री ही पद पर बने रहे अगर उन्हें प्रतिनिधि चुनते हैं तो।

भाजपा ने 2012 में 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 21 सीटों जीती थीं. भाजपा ने राज्य में चार फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए अपनी पहली सूची कल जारी की है, जिसमें मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर का भी नाम है।

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