मनमोहन सिंह की वजह से सलाखों के पीछे पहुंचा राम रहीम, राजनीतिक दबाव के बावजूद CBI के साथ खड़े रहे पूर्व पीएम

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने साध्वी से दुष्कर्म के दो मामलों में दोषी करार दिए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सोमवार(28 अगस्त) को 20 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। इस बीच सोशल मीडिया का एक धड़ा राम रहीम को सलाखों के पीछे पहुंचाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहा है। 

बहरहाल, इस मामले में मौजूदा प्रधानमंत्री की भूमिका का तो पता नहीं, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर इस मामले की जांच में शामिल एक अधिकारी ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, राम रहीम केस में सीबीआई के रिटायर्ड डीआईजी और मुख्य जांच अधिकारी एम. नारायण ने कहा है कि राजनीतिक दवाब के के बावजूद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह सीबीआई के साथ हमेशा से खड़े रहे।

एक इंटरव्यू में इसका खुलासा करते हुए नारायण ने कहा कि पूर्व पीएम निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई के अधिकारियों को पूरी तरह छूट दी थी। अधिकारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर इस राम रहीम केस को लेकर तमाम नेताओं की तरफ राजनीतिक दबाव बनाया गया गया था।

उन्होंने बताया कि हरियाणा-पंजाब के कुछ सांसदों ने मनमोहन सिंह पर काफी दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने इन दबावों को खारिज करते हुए जांच जारी रखने को कहा। अधिकारी का कहना है कि उस वक्त राम रहीम के खिलाफ जांच नहीं करने को लेकर तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह पर बहुत दबाव था, लेकिन उन्होंने उस राजनीतिक दबाव को नजरंदाज करते हुए अधिकारियों को जांच जारी रखने को कहा था।

नारायण ने कहा कि पूर्व पीएम ने हमें स्पष्ट निर्देश थे कि हम कानून के अनुसार चलें। अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद मनमोहन सिंह ने तत्कालीन सीबीआई प्रमुख विजय शंकर को तलब किया था और उन्होंने इस मामले पर शंकर से चर्चा से चर्चा की। अधिकारी के मुताबिक, पीड़ितों का बयान देखने के बाद मनमोहन सिंह ने सीबीआई को अपनी जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

राम रहीम को 20 की सजा

बता दें कि सीबीआई की एक विशेष अदालत ने साध्वी से दुष्कर्म के दो मामलों में दोषी करार दिए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सोमवार(28 अगस्त) को 10-10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। अब बाबा को 20 साल जेल में रहना होगा, क्योंकि दोनों सजाएं एक के बाद एक चलेंगी। यानी एक सजा पूरी होने के बाद दूसरी शुरू होगी।

जेल के साथ ही विशेष सीबीआई जज जगदीप सिंह ने राम रहीम पर दोनों मामलों में 15-15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने पर राम रहीम को दो-दो साल की और सश्रम कैद भुगतनी होगी। इनमें से 14-14 लाख रुपये की राशि दोनों पीड़िताओं को दी जाएगी।

 

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