माल्या को नहीं करेंगे डिपोर्ट: ब्रिटेन

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हिंदुस्तान में बैंकों के 9 हजार करोड़ के बकायेदार विजय माल्या को डिपोर्ट करने से ब्रिटेन ने साफ मना कर दिया है। ब्रिटेन की सरकार ने भारत सरकार से कहा है कि वो माल्या के प्रर्त्यपण की अर्जी पर फिर से विचार करे। हालांकि ब्रिटेन सरकार ने भारत को जांच में मदद करने का भरोसा दिया है।
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ब्रिटिश सरकार के इस फैसले की जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने दी। दरअसल, ब्रिटेन की सरकार के साथ प्रर्त्यपण संधि का अनुछेद 9 भारत के लिए विजय माल्या के प्रर्त्यपण में मुश्किलें पैदा कर सकता है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, “ब्रिटेन सरकार ने हमें बताया है कि इमीग्रेशन लॉ (1971) के मुताबिक, वह किसी भी आरोपी को तब तक ब्रिटेन में रहने से नहीं रोक सकती जब तक उसके पास वैध पासपोर्ट और वीजा है।” इसका मतलब ये हुआ कि जब तक माल्या का पासपोर्ट वैलिड रहता है, तब तक वो ब्रिटेन में रह सकते हैं। माल्या ने दो मार्च को भारत छोड़ा था। इसके बाद भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था। लेकिन तकनीकी तौर पर इसका मतलब साफ है कि माल्या जब ब्रिटेन पहुंचे तो उनका पासपोर्ट वैलिड था।

दरअसल ब्रिटेन की सरकार के साथ प्रर्त्यपण संधि का अनुछेद 9 आरोपी को बचने के कई मौके देता है। जैसे कि अगर आरोपी यह अर्जी लगा दे कि नस्ल, धर्म, नागरिकता या राजनीतिक विचारधाराओं को आधार बनाते हुए उस पर मुकदमा चलाया जा रहा है तो उसका प्रर्त्यपण रुक सकता है। दूसरा आरोपी को उसकी नागरिकता या राजनीतिक विचारधाराओं की वजह से डिटेन या नजरबंद नहीं किया जा सकता।

तीसरा छोटे जुर्म के लिए प्रर्त्यपण की अपील करने में देरी भी आरोपी को फायदा पहुंचा जा सकती है। इसके अलावा ब्रिटेन का मानवाधिकार कानून वहां के हर नागरिक के 15 मूल अधिकारो का बचाव करता है। ब्रिटेन से किसी का प्रर्त्यपण तभी किया जा सकता है, बशर्ते संबंधित देशों में आरोपी के मानवाधिकारो का उल्लंघन न हो। इस तरह के क़ानून की वजह से ब्रिटेन दशकों से रईस लोगों के लिए पनाहगाह बना हुआ है। आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी, नेवी वॉर रूम लीक मामले के रवि शंकरन, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम सैफी जैसे कई बड़े नाम हैं जिन्हे आज तक भारत सरकार प्रत्यापित नहीं करा पायी है।

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