मालेगांव धमाके की आरोपी और BJP सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सप्ताह में एक बार NIA कोर्ट में पेश होने का आदेश

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मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुकीं इस मामले में अभियुक्त और भोपाल से भारतीय जनता पार्ट की नवनिर्वाचित सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मुश्किलें बढ़ सकती है। स्पेशल एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को सप्ताह में एक बार अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को निर्देश दिए हैं कि वो सप्ताह में कम से कम एक जरूर पेश हों।

इससे पहले प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित और सुधाकर चतुर्वेदी को अदालत में पेशी से छूट मिली हुई थी। तीनों ने याचिका में निजी परेशानियों का हवाला देकर यह रियायत मांगी थी, जिसे उस समय अदालत ने मंजूर किया था। बता दें कि 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाकों के मामले में प्रज्ञा आरोपी हैं और तकरीबन 9 साल जेल में रही हैं। इस बहुचर्चित मामले में वह इन दिनों जमानत पर चल रही हैं।

प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड एक बाइक मालेगांव बम विस्फोट में इस्तेमाल होने के चलते 2008 में उनकी इस मामले में गिरफ्तारी हुई थी। मालेगांव बम विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा को 2008 में गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें मामले में क्लीन चीट दे दी है, लेकिन अदालत ने उन्हें मामले में बरी करने से इंकार कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ मकोका के तहत आरोप हटा दिए और अब उन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।

इस मामले में बंबई हाई कोर्ट ने उन्हें 2017 में जमानत दे दी। हालांकि, साध्वी प्रज्ञा की मुसीबतें अभी कम नहीं हुई हैं क्योंकि कांग्रेस नीत मध्य प्रदेश सरकार उनके खिलाफ पुरानी हत्या के एक मामले को फिर से खोलने की योजना बना रही है। प्रदेश के विधि मंत्री पीसी शर्मा ने हाल ही में कहा कि सरकार पूर्व आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या के मामले को फिर से खोलने पर कानूनी राय ले रही है। जोशी की 29 दिसंबर, 2007 को देवास जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ठाकुर और सात अन्य आरोपियों को एक अदालत ने 2017 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

भोपाल से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनी गईं नवनिर्वाचित सांसद साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमामंडन किया थी। इस मामले पर देश भर में काफी राजनीतिक बयानबाजी हुई थी। प्रज्ञा ने गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया था, जिसको लेकर पूरे देश में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई और बाद में उन्हें अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए इसे वापस लेना पड़ा।

ठाकुर भोपाल लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की उम्मीदवार बनने के मात्र एक घंटे पहले ही भाजपा में शामिल हुई थीं। उम्मीदवार बनने के दूसरे ही दिन मालेगांव बम विस्फोट के आरोप में पुलिस हिरासत के दौरान मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे को लेकर विवादास्पद बयान देकर वह चुनाव प्रचार के प्रारंभ में ही सुर्खियों में आ गई थीं। हालांकि इस बयान की आलोचना के बाद अगले ही दिन उन्होंने बयान वापस लेते हुए माफी मांग ली।

कांग्रेस की कथित भगवा आतंकवाद की अवधारणा के खिलाफ सत्याग्रह के नाम पर भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और उन्होंने दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को भारी मतों के अंतर से पराजित कर दिया। उस वक्त नई दिल्ली में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में भाजपा अध्यक्ष (अब गृह मंत्री) अमित शाह ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर भगवा आतंकवाद की अवधारणा गढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा था कि साध्वी प्रज्ञा की भाजपा से उम्मीदवारी ‘भगवा या हिंदू आतंकवाद की अवधारणा’ के खिलाफ भाजपा का सत्याग्रह है।

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