मालेगांव धमाकों में मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था: NIA

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भले ही राष्ट्रीय जांच ऐजन्सी (एनआइए) की चार्जशीट में महाराष्ट्र एटीएस के उस दावे को नकार दिया गया हो कि मालेगांव धमाकों में विस्फोटक का इंतेजाम लेफ्टिनेंट कर्नेल प्रसाद पुरोहित ने किया था, लेकिन एनआइए इस बात से सहमत है कि मालेगांव धमाकों में मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। इस मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स को सिर्फ आर्मी या फिर आतंकी संगठनों से ही हासिल किया जा सकता है।

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र एटीएस मालेगांव धमाकों की साइट से लिए गए नमूनों के फोरेंसिक जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची थी कि धमाकों में मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था।

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक महाराष्ट्र एटीएस के इस दावे पर राष्ट्रीय जांच ऐजन्सी (एनआइए) ने भी किसी तरह का सवाल नहीं उठाया है। हालांकि एनआइए आज तक इस मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स के सूत्र के बारे में खामोश है। एनआइए के मुताबिक वक़्त के काफी अंतराल बीत जाने के वजह से मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स के सूत्र का पता नहीं चल पाया है। बता दे कि मालेगांव धमाकों कि जांच एनआइए को साल 2011 में सौप दी गयी थी।
राष्ट्रीय जांच ऐजन्सी (एनआइए) का ये बयान महाराष्ट्र एटीएस के उस दावे के बिल्कुल विपरीत है जिसमे महाराष्ट्र एटीएस ने दावा किया था कि साल 2006 में जब लेफ्टिनेंट कर्नेल प्रसाद पुरोहित आर्मी के नासिक स्थित देओलाली केम्प में पोस्टेड थे तो वो सरकारी काम से जम्मू कश्मीर गए थे। जहां से वो करीब 60 किलो मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स लेकर लौटे थे। एनआइए का कहना है कि मामले की सघन जांच के बाद भी जम्मू कश्मीर में जब्त किए गए मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स की कोई नहीं हुई। एनआइए की चार्जशीट के मुताबिक आतंकियों से जम्मू कश्मीर में जब्त किए गए मिलिटरी ग्रेड आरडीएक्स को या तो नष्ट कर दिया जाता है या फिर जम्मू कश्मीर पुलिस को सौप दिया जाता है।

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गौरतलब है कि एनआइए इस बात पर भी खामोश है कि ब्लास्ट के लिए बम कैसे असेम्बल हुए और उन्हे कैसे मालेगांव लाया गया। इस मामले में भी राष्ट्रीय जांच ऐजन्सी (एनआइए) ने महाराष्ट्र एटीएस के उस दावे को नज़रअंदाज़ कर दिया जिसमे कहा गया था कि मालेगांव धमाकों के लिए बम सुधाकर चतुर्वेदी के देओलाली स्थित किराए के घर पर असेम्बल किए गए। एनआइए के मुताबिक इन दावों के लिए पेश किए गए सबूत मनगढ़ंत है। ठीक इसी तरह एनआइए ने महाराष्ट्र एटीएस को दिये गए आरोपी धन सिंह के उस बयान को भी नकार दिया जिसमे उसने इस बात को कबूल किया है कि विस्फोटकों से लेस मोटर साइकल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी।

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