किसान आंदोलन के समर्थन में गाजीपुर बॉर्डर पहुंचीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पोती, बोलीं- अन्नदाताओं की भलाई में ही देश का हित

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केंद्र सरकार के विवादास्पद नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए महात्मा गांधी की पोती तारा गांधी भट्टाचार्य शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर पहुंचीं। भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि महात्मा गांधी की पोती तारा गांधी नए कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में गाजीपुर बॉर्डर पर आईं थीं। राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की अध्यक्ष तारा (84) ने यहां प्रदर्शनकारी किसानों से विरोध-प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की।

गाजीपुर बॉर्डर

बता दें कि, 84 वर्षीय तारा गांधी भट्टाचार्य राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की अध्यक्ष भी हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंची भट्टाचार्य ने किसानों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सरकार से कृषक समुदाय की ‘‘सुध लेने” का भी अनुरोध किया। उनके साथ गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही, ऑल इंडिया सर्व सेवा संघ के प्रबंध न्यासी अशोक सरन, गांधी स्मारक निधि के निदेशक संजय सिंहा और राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ए अन्नामलाई भी आंदोलन स्थल पहुंचे हुए थे।

दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर यहां गाजीपुर में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बीकेयू के बयान के मुताबिक तारा गांधी भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘हम यहां किसी राजनीतिक कार्यक्रम के तहत नहीं आए हैं। हम आज यहां किसानों के लिए आए हैं, जिन्होंने हम सभी को हमारे पूरे जीवन में अन्न दिया है।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा, ‘‘हम आप सभी के चलते ही (जीवित) हैं। किसानों की भलाई में ही देश की और हम सब की भलाई है।”

भट्टाचार्य ने अंग्रेजों के शासन से मुक्ति के लिए 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हुए कहा कि वह भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ से ही शुरू हुआ था। बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक महात्मा गांधी की पोती ने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर किसानों के लिए प्रार्थना करने आई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि जो कुछ हो, उसका फायदा किसानों को मिलना चाहिए. किसानों की कड़ी मेहनत से कोई भी व्यक्ति अनजान नहीं है।”

गौरतलब है कि, पिछले साल नवंबर से ही काफी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. वे केंद्र के नये कृषि कानूनों को रद्द करने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने वाला एक नया कानून लाने की मांग कर रहे हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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