महाराष्ट्र: गांव के लोगों का दावा- किसी को भी डाले गए वोट बीजेपी के खाते में गए

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महाराष्ट्र के एक गांव के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि सोमवार को लोकसभा उपचुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी थी जिसके चलते किसी भी उम्मीदवार को डाले गए वोट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में चले गए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने इस दावे को खारिज किया है।

महाराष्ट्र
फाइल फोटो

राकांपा नेता शशिकांत शिन्दे ने कहा कि जब वह सतारा जिले में कोरेगांव तहसील के नवलेवाडी गांव में चुनाव बूथ पर पहुंचे तो उन्होंने इस तरह की चीज होती हुई देखी। पश्चिमी महाराष्ट्र में कोरेगांव विधानसभा क्षेत्र की चुनाव अधिकारी कीर्ति नलवाडे ने ग्रामीणों के दावे को खारिज किया। शिंदे ने कहा कि चुनाव आयोग को इस घटना पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और इसकी पुनरावृत्ति की जांच के लिए कदम उठाना चाहिए।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीणों ने कहा कि राकांपा उम्मीदवार श्रीनिवास पाटिल को दिए गए वोट भाजपा उम्मीदवार उदयनराजे भोसले के खाते में जा रहे थे। जिला निर्वाचन अधिकारियों ने इस दावे को खारिज किया। शिन्दे ने कहा कि जब वह चुनाव बूथ पर पहुंचे और अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने जल्दी से ईवीएम बदल दी। बता दें कि, राज्य विधानसभा चुनाव के साथ ही सतारा लोकसभा सीट पर उपचुनाव भी 21 अक्टूबर को हुआ।

शिन्दे ने कहा, ‘मुझे कुछ मतदाताओं और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सूचना मिली कि राकांपा उम्मीदवार को दिए जा रहे वोट भाजपा उम्मीदवार के खाते में जा रहे हैं। जब तक मैं वहां पहुंचा, तब तक इस तरह लगभग 270 वोट डाले जा चुके थे।’ वहीं इस मामले पर चुनाव अधिकारी कीर्ति नलवाडे ने कहा,, ‘मतदाताओं द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद हमने उनसे मॉक टेस्ट के लिए एक फॉर्म भरने को कहा, लेकिन इसके लिए वे तैयार नहीं हुए।’

चुनाव अधिकारी ने कहा, ‘हमने मशीन उनके दावे की वजह से नहीं, बल्कि बटन दबाने में कुछ दिक्कत के चलते बदली। मशीन बदलने का संबंधित दावे को कोई लेना-देना नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सुबह के समय मतदान शुरू होने से पहले सभी बूथ एजेंटों की मौजूदगी में एक ‘छद्म अभ्सास’’ किया गया और उस समय किसी ने भी आपत्ति नहीं की। शाम चार बजे तक मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चला।

सिक्किम के पूर्व राज्यपाल पाटिल ने कहा कि उन्होंने गांव के कुछ मतदाताओं की सूचना के आधार पर मुद्दा चुनाव अधिकारियों के समक्ष उठाया है।

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