“ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए”: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित आर्य ने मुनव्वर फारूकी की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने सोमवार को स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के जमानत मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। बता दें कि, मुनव्वर फारुकी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के एक मामले में इंदौर पुलिस ने 2 जनवरी को गिरफ्तार किया था। लाइव लॉ के अनुसार, न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने कहा, “ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। मैं योग्यता के आधार पर आदेश सुरक्षित रखूंगा।”

मुनव्वर फारूकी

न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने मुनव्वर फारूकी के वकील से पूछा, “लेकिन आप अन्य लोगों की धार्मिक भावनाओं और भावनाओं का अनुचित लाभ क्यों उठाते हैं। आपकी मानसिकता में क्या गलत है? आप अपने व्यवसाय के उद्देश्य के लिए यह कैसे कर सकते हैं?”

न्यायाधीश ने फारुकी के वकील विवेक तन्खा से पूछा, “आप अपने आवेदन पर आपत्ति करना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं?” तन्खा ने कहा, “उसने इस मामले में कोई अपराध नहीं किया है, उसे जमानत दी जानी चाहिए।

फारुकी की जमानत अर्जी पर आपत्ति जताने के बाद एक वकील ने कहा, आरोपी मुनव्वर फारूकी ने पिछले कई वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं, जिसमें शो के दौरान कॉमेडियन द्वारा हिंदू देवताओं के खिलाफ अत्यधिक आपत्तिजनक टिप्पणी की गई।

जब पीठ ने पूछा कि क्या अन्य वकील जमानत याचिका का विरोध कर रहे हैं, तो एक अन्य वकील ने आरोप लगाया कि फारुकी ने भगवान राम और सीता के खिलाफ अन्य आपत्तिजनक बयान दिए। न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने कहा, “ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। मैं योग्यता के आधार पर आदेश सुरक्षित रखूंगा।”

दरअसल, इंदौर शहर के 56 दुकान क्षेत्र के एक कैफे में 1 जनवरी को आयोजित एक शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी करने के चलते चार अन्य लोगों के साथ गुजरात के जूनागढ़ के रहने वाले स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के खिलाफ स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौर के बेटे एकलव्य सिंह गौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों की पहचान एडविन एंथोनी, प्रखर व्यास और प्रियम व्यास के रूप में की गई। पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ धारा -299-ए और धारा 269 भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया था।

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