EXCLUSIVE: योगी राज में अब शिक्षण संस्थानों तक पहुंची सांप्रदायिकता की आग! ‘हिजाब’ पहनने के कारण महिला टीचर को स्कूल ने नौकरी से निकाला

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इस्लामोफोबिया का डर दुनियाभर में देखा जाता है, अब हमारे देश में भी इसी आधार पर भेदभाव देखने को मिल रहा है।राजनीतिक पार्टियों द्वारा लोगों में फैलाई जा रही सांप्रदायिकता की आग अब देश के शिक्षण संस्थानों तक पहुंच गई है। इसका ताजा नमूना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक स्कूल में देखने को मिला है, जहां एक मुस्लिम महिला टीचर को नौकरी से केवल इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि वह हिजाब पहनती थी।

प्रतिकात्मक तस्वीर

जी हां, लखनऊ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां स्कूल प्रबंधन ने फातिमा हसन नाम की एक मुस्लिम महिला टीचर को नौकरी से इसलिए निकाल दिया, क्योंकि वह हिजाब (हेड कवर) पहनकर बच्चों को पढ़ाने आती थी। यह मामला लखनऊ के ठाकुरगंज थाना इलाके के तहसीनगंज चौराहे पर स्थित सुपर मॉडल स्कूल का है। पीड़िता टीचर का नाम फातिमा हसन है।

आरोप है कि स्कूल के प्रिंसिपल ने फातिमा को हिजाब पहनकर क्लास में न पढ़ाने के लिए हिदायत दी थी, लेकिन जब उन्होंने स्कूल के फरमान को मानने से इनकार कर दिया तो उससे जबरन इस्तीफा ले लिया गया। हालांकि यह मामला तीन नवंबर का है, लेकिन टीचर अब मीडिया के सामने आई हैं। टीचर फातिमा हसन का आरोप है कि उन्हें स्कूल प्रबंधन द्वारा हिजाब पहनकर क्लास न लेने की हिदायत दी गई। फातिमा हसन पिछले एक साल से स्कूल में पढ़ा रही थीं।

‘जनता का रिपोर्टर’ से बताई आपबीती

फातिमा ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में हिजाब को लेकर स्कूल प्रबंधन द्वारा नौकरी से निकाले जाने की पुष्टि की है। फातिमा का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा पिछले कई दिनों से उन पर हिजाब पहनकर स्कूल न आने का दबाव बनाया जा रहा था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो स्कूल प्रबंधन ने उनसे इस्तीफे की मांग कर दी। भारी दबाव के बाद शिक्षिका को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा।

फातिमा ने बताया कि वह एक साल पहले स्कूल ज्वाइन की थी, लेकिन हिजाब की वजह से उन्हें तीन नवंबर को इस्तीफा देना पड़ा। शिक्षिका ने फोन पर अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह पिछले एक साल से हिजाब बांधकर बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाती थीं। लेकिन एक दिन अचानक से स्कूल प्रबंधन द्वारा कहा गया है कि अब हिजाब पहनकर आप स्कूल नहीं आ सकती है, क्योंकि यह इंग्लिश मीडियम स्कूल है और क्लास या स्कूल परिसर में रहने पर यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की नजर पड़ती है।

फातिमा द्वारा इसका विरोध करने पर स्कूल प्रबंधन ने तत्काल एक मीटिंग बुलाई और उन्हें सीधे-सीधे फरमान जारी कर कहा गया कि अगर आपको स्कूल में पढ़ाना है तो बिना हिजाब के आना होगा। शिक्षिका का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन का कहना था कि हिजाब पहनकर आने से स्कूल की छवि खराब हो रही है। फातिमा ने कहा कि अधिकारियों का कहना है कि हिजाब की वजह से उनसे स्कूल में पहले के मुकाबले बच्चों में काफी कमी आ गई है। इसलिए आप अभिभावकों के सामने हिजाब बांधकर न आए।

फातिमा ने बताया कि दरअसल, अधिकारियों को लगता है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बच्चों में जो कमी आई है उसकी मुख्य वजह हिजाब है। फातिमा ने बताया कि पहले उसकी इस बात को लेकर स्कूल प्रबंधन से काफी बहस हुई। लेकिन स्कूल प्रबंधन उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुए और उन्होंने उनसे इस्तीफा मांग लिया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि अगर फातिमा स्कूल में पढ़ाना चाहती हैं तो उन्हें हिजाब पहनकर नहीं आना होगा।

हालांकि, शिक्षिका बिना हिजाब स्कूल आने को राजी नहीं हुई और उन्होंने इस्तीफा देना बेहतर समझा। इस मामले में ‘जनता का रिपोर्टर’ ने सुपर मॉडल स्कूल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बुधवार दोपहर 1.30 बजे स्कूल बंद होने की वजह से किसी अधिकारी से हमारी बात नहीं हो पाई है। जैसे ही स्कूल प्रबंधन या प्रिंसिपल की प्रतिक्रिया आएगा हम अपने न्यूज में अपडेट करेंगे।

सभी धर्मों का हो सम्मान

फातिमा ने इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि मैं पुलिस में शिकायत नहीं करना चाहती हूं। पता नहीं कैसे यह मामला आप लोगों (मीडिया) तक पहुंच गया। मैं बस यही चाहती हूं कि सभी धर्मों का सम्मान हो, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति ऐसी है कि जहां सभी धर्मों की महिलाएं अपने-अपने हिसाब से पर्दे में रहती हैं। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को लेकर काफी दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वह इस बारे में फैसला लेने के लिए कुछ दिन का समय चाहती हैं।

 

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