मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में संग्राम, हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्‍थगित

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बहुमत के रथ पर सवार होकर चार साल से बेहिचक सरकार चला रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली परीक्षा की घड़ी बिल्कुल करीब आ गई है। तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) और वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से अब मंगलवार (20 मार्च) को लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा। सोमवार को हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। वाईएसआर कांग्रेस के वाई वी सुब्बारेड्डी और टीडीपी ने भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे रखा है।

आतंकवाद
फाइल फोटो- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

मोदी सरकार के खिलाफ वाईएसआर कांग्रेस और तेलगु देशम पार्टी आज लोकसभा में अपना अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सोमवार को पुरजोर कोशिश करती दिखीं। हालांकि संसद की कार्यवाही शुरू होते ही कई विपक्षी सांसद वेल में जाकर हंगामा करने लगे, जिस कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही मंगलवार तक के लिए, जबकि राज्यसभा दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

इस अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में जहां कई विपक्षी पार्टियां लामबंद होती दिख रही हैं, वहीं संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि, ‘हम पूरी तरह आश्वस्त हैं। सदन में हमारे पास बहुमत है और हम अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने को तैयार हैं।’ हालांकि बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने सांसद अरविंद सावंत ने कहा है कि उनकी पार्टी न तो सरकार के समर्थन करेगी और न विपक्ष के साथ जाएगी। इसे एक तौर पर एनडीए को बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस ने सबसे पहले केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। दरअसल केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया इसके बाद सूबे में विपक्ष की भूमिका निभा रही वाईएसआर कांग्रेस ने यह कदम उठाया। वाईएसआर कांग्रेस से प्रतिद्वंद्विता और आंध्र से जुड़ा मसला होने की वजह से टीडीपी भी उसी रास्ते पर चली और चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए से अपनी दोस्ती तोड़ने का ऐलान कर दिया।

इसके बाद टीडीपी ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अब दोनों पार्टियां दूसरे विपक्षी दलों से भी अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन लेने में जुटी हुईं हैं। दरअसल अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन हासिल होना चाहिए। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, एसपी के अलावा लेफ्ट पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि केंद्र सरकार को पूरा भरोसा है कि वह बहुमत साबित कर लेगी।

केंद्र सरकार ने भरोसा जताया है कि नोटिस स्वीकार कर लिए जाने पर भी लोकसभा में उसकी संख्या बल के कारण प्रस्ताव औंधे मुंह गिर जाएगा। दरअसल, वर्तमान स्थिति में 543 सदस्यीय लोकसभा में मौजूदा सदस्यों की संख्या 539 है। ऐसी स्थिति में बहुमत साबित करने के लिए 270 सांसदों की जरूरत है। जबकि अकेले बीजेपी के पास 274 सांसद हैं। इसके अलावा बीजेपी को अन्य सहयोगियों का समर्थन भी है।

 

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