दिल्ली: जब CBI का मुकदमा लड़ने के लिए हाईकोर्ट में आपस में भिड़े 2 वकील, जज के सामने हुई कहासुनी

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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के भीतर ही इन दिनों घमासान मचा हुआ है। एजेंसी के आला अधिकारियों पर रिश्‍वत लेने के आरोप लगे हैं। इस बीच सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार (1 नवंबर) को दिल्ली हाईकोर्ट में उस वक्त भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जब जांच एजेंसी की तरफ से पैरवी करने के लिए दो-दो वकील कोर्टरूम में पहुंच गए। रिपोर्ट के मुताबिक, हालात यहां तक पहुंच गया कि जज के सामने ही दोनों वकील सीबीआई का मुकदमा लड़ने के लिए आपस में भिड़ गए।

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट में दो वकीलों ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के वकील के तौर पर पेश होने का एक-दूसरे का विरोध किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता विक्रमजीत बनर्जी और के. राघवाचार्युलु अदालत में एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान एक-दूसरे से उलझ गए।

दोनों वकीलों ने न्यायमूर्ति नजमी वाजिरी को बताया कि वे मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गुरुवार को मामले में पहली बार अदालत में हाजिर हुए बनर्जी ने अदालत को बताया कि उन्हें मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व करने के लिए ‘सक्षम अधिकारी’ से निर्देश मिले हैं।

लेकिन राघवाचार्युलु ने बनर्जी की मौजूदगी का विरोध किया और अदालत को बताया कि उन्हें जांच एजेंसी द्वारा मामले में विशेष लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्त किया गया है। राघवाचार्युलु हाई कोर्ट में अस्थाना की याचिका पर 23 अक्टूबर को शुरू हुई सुनवाई के वक्त से ही उनकी तरह से पेश हो रहे हैं।

हालांकि अदालत ने इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और अस्थाना की गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की अवधि 14 नवंबर तक बढ़ा दी। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख तक इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया है।

सीबीआई ने हाई कोर्ट से कहा- ‘राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज FIR संज्ञेय अपराध को दर्शाती है’

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार (1 नवंबर) को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और अन्य लोगों के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों में दर्ज प्राथमिकी संज्ञेय अपराध दिखाती है। एजेंसी ने प्राथमिकी रद्द करने की अस्थाना की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि इस स्तर पर रोविंग इंक्वायरी (विषय वस्तु से असंबद्ध) की अनुमति नहीं है।

साथ ही सीबीआई ने अदालत से यह भी कहा कि अस्थाना के खिलाफ जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, विभिन्न दस्तावेजों और अन्य लोगों की भूमिकाओं की जांच की जा रही है। इसी संबंध में एजेंसी ने अदालत को बताया कि वह असमर्थ है क्योंकि कुछ फाइल और दस्तावेज सीवीसी (केन्द्रीय सकर्तता आयोग) की निगरानी में हैं। एजेंसी ने अस्थाना द्वारा लगाए गए सभी प्रतिकूल आरोपों का खंडन किया है।

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