बिहार चुनाव : अंतिम चरण में भाजपा को मिलेगी तगड़ी चुनौती

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बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को तगड़ी चुनौती मिलने वाली है, क्योंकि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद वह लोकसभा की चारों सीटों पर चारों खाने चित्त हो गई थी। इस क्षेत्र के 24 निर्वाचन क्षेत्रों में गुरुवार को मतदान होंगे।

चार जिलों में बंटा यह क्षेत्र राज्य का पूर्वोत्तर क्षेत्र है। इस क्षेत्र में मुकाबला बहुकोणीय हो गया है, जिसमें असदुद्दीन की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

भाजपा चार पार्टियों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का महागठबंधन हर सीट पर सीधा चुनौती दे रहा है, जबकि कई अन्य पार्टियां भी हैं, जो ताल ठोक रही हैं।

इनमें पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (जेएपी), हैदराबाद से सांसद ओवैसी की एआईएमआईएम तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) है।

इनकी उपस्थिति से भाजपा गठबंधन व महागठबंधन दोनों खेमों में बेचैनी देखी जा सकती है।

24 निर्वाचन क्षेत्रों वाले इस क्षेत्र में अररिया व किशनगंज जिले में मुस्लिम मतदाताओं की काफी तादाद है। किशनगंज में मुस्लिम आबादी 67 फीसदी, जबकि कटिहार में 43 फीसदी, अररिया में 40 फीसदी व पूर्णिया में 37 फीसदी है।

पूरी तरह पिछड़े इलाके में मुसलमानों का वोट महागठबंधन, जेएपी, एआईएमआईएम तथा राकांपा के बीच बंटा हुआ है।

मुस्लिमों का कुछ मत छोटी पार्टियों को, जबकि बड़ा समर्थन नीतीश कुमार के जनता दल (युनाइटेड), लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा कांग्रेस को मिलेगा।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के तहत भाजपा 18 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि छह सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) तथा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) के हिस्से में गई हैं।

महागठबंधन के तहत कांग्रेस ने 10, जद (यू) ने नौ तथा राजद ने पांच निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

ओवैसी की एआईएमआईएम छह सीटों पर ताल ठोक रही है, जिनमें पूर्णिया जिले का बायसी, किशनगंज का कोचाधामन व किशनगंज, अररिया का रानीगंज व कटिहार जिले का बलरामपुर निर्वाचन क्षेत्र है।

कोचाधामन सीट पर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और निवर्तमान विधायक अख्तरूल इमाम का सीधा मुकाबला जद (यू) के मुजाहिद आलम, भाजपा के अब्दुर रहमान व जेएपी के गुलरेज रोशन के साथ है।

इमाम ने साल 2010 में राजद के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में उन्होंने जद (यू) का दामन थाम लिया। साल 2014 में लोकसभा चुनाव में वह जद (यू) के उम्मीदवार थे, लेकिन बाद में वह चुनाव मैदान से हट गए थे।

किशनगंज में एआईअमआईएम की उपस्थिति ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। यहां मुकाबला कांग्रेस के निवर्तमान विधायक मोहम्मद जावेद, भाजपा के स्वीटी सिंह व एआईअमआईएम के तासीरूद्दीन के बीच है।

किशनगंज के निवासी आलोक सिंह (32) ने आईएएनएस से कहा, “ओवैसी युवा मतदाताओं को आकर्षित कर रहे है और उनकी उपस्थिति से हिंदू एकजुट हो रहे हैं। वह एक सीट से अधिक पर जीत दर्ज नहीं कर सकते, लेकिन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव लाने का काम कर रहे हैं।”

रुईदासा ग्राउंड इलाके में एक दुकान में काम करने वाले महबूब आलम (28) ने आईएएनएस से कहा, “यहां कांग्रेस के बहुत सारे समर्थक हैं, लेकिन इस बार मैं ओवैसी का समर्थन करूंगा।”

किशनगंज के पोठिया जिले के फिरोज आलम ने कहा, “ओवैसी निश्चित रूप से कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेरेंगे।”

राकांपा व जेएपी ने लगभग हर निर्वाचन क्षेत्र में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। राकांपा का कटिहार में गढ़ मजबूत रहा है, जिसके नेता तारिक अनवर हैं और वर्तमान में सांसद हैं।

जेएपी नेता पप्पू यादव का पूर्णिया में काफी प्रभाव है, जहां से उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।

साल 2010 में भाजपा ने जद (यू) गठबंधन के साथ सीमांचल इलाके में 24 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। राजद के खाते में तीन तथा कांग्रेस व लोजपा के खाते में एक-एक सीट गई थी, जबकि जद (यू) ने चार सीटें जीती थी। कटिहार के बलरामपुर से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

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