चारा घोटाला: लालू यादव को दो अलग-अलग धाराओं में 14 साल की सजा, 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया

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चारा घोटाले के चौथे मामले (दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामला) में भी दोषी करार दिए गए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सीबीआई के विशेष कोर्ट ने शनिवार (24 मार्च) को सजा का ऐलान कर दिया। लालू को दो धाराओं में सात-सात साल की सजा का ऐलान किया गया है। दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी। साथ ही लालू यादव पर 60 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

File PHOTO: PTI

जुर्माना ना देने की स्थिति में 1-1 साल की सजा बढ़ जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में लालू प्रसाद और ओमप्रकाश दिवाकर को आईपीसी की धारा में सात वर्ष की सजा और 30 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है। वहीं पीसी एक्ट की धारा में सात वर्ष की सजा और 30 लाख जुर्माना लगाया गया है। ऐसे में इन दोनों को 14 वर्ष की सजा काटनी होगी और 60 लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा।

बता दें कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू को सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार (19 मार्च) को दोषी करार दिया था। वहीं इसी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया था। चारा घोटाले के तीन मामलों में सजा पाने के बाद बिरसा मुंडा जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सोमवार को विशेष सीबीआई अदालत ने दुमका कोषागार से तीन करोड़ 13 लाख रुपये का गबन के मामले में भी दोषी करार दिया था।

वहीं इसी मामले में अदालत ने बिहार के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 12 लोगों को इस मामले में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने लालू समेत 19 लोगों को दोषी करार दिया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व विधायक ध्रुव भगत, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पूर्व विधायक आर के राणा समेत 12 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

चारा घोटाले के तीन मामलों में पहले ही सजा पा चुके लालू प्रसाद यादव को देवघर कोषागार एवं चाईबासा कोषागार के गबन के दो मामलों में क्रमशः 23 दिसंबर एवं 24 जनवरी को दोषी ठहराया जा चुका है। अदालत ने इस मामले में तत्कालीन आयकर आयुक्त अधीषचंद्र चौधरी, पूर्व आईएएस अधिकारी बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद तथा तत्कालीन मंडलायुक्त एम सी सुबर्णो को भी बरी कर दिया था।

वहीं दूसरी ओर अदालत ने एक अन्य आईएएस अधिकारी फूलचंद्र सिंह, पशुपालन विभाग के कुछ अधिकारियों एवं चारा आपूर्तिकर्ताओं को दोषी करार दिया था। इस मामले में कुछ 47 आरोपी थे, जिनमें से 14 की मौत हो चुकी है और दो आरोपी सरकारी गवाह बन गये। इससे पूर्व अदालत ने शुक्रवार को बिहार के तत्कालीन महालेखा परीक्षक समेत महालेखाकार कार्यालय के तीन अधिकारियों के खिलाफ भी इस मामले में मुकदमा चलाने की लालू यादव की याचिका स्वीकार करते हुए तीनों को समन जारी किये थे।

केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने चारा घोटाले के दुमका कोषागार से तीन करोड़, तेरह लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़े मामले में पांच मार्च को सुनवाई पूरी की थी। लालू यादव एवं अन्य के खिलाफ रांची में चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार से बड़ी राशि गबन के मामले में एक अन्य मामले में सुनवाई जारी है और उसमें भी अगले कुछ माह में फैसला आ सकता है।

इस बीच लालू यादव ने 23 दिसंबर को आये सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील भी की थी जिसे 23 फरवरी को न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभी इस मामले में हुई सजा की आधी अवधि भी लालू ने जेल में नहीं काटी है लिहाजा उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है।

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