संसद में बोलीं सुषमा- कुलभूषण जाधव भारत का बेटा है, उसे बचाने के लिए कुछ भी करेगी सरकार

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पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को रॉ एजेंट बताकर मौत की सजा सुनाए जाने को लेकर आज(11 मार्च) संसद में सभी राजनीतिक पार्टियों ने पाक को खरी-खरी सुनाई। सबसे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को उठाया।

Kulbhushan Jadhav

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अगर कुलभूषण जाधव को फांसी होती है, तो हम उसे सोचा समझा मर्डर कहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जाधव को बचाया नहीं जा सका तो यह भारत सरकार की कमजोरी होगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उस वक्त यह मामला उठाना चाहिए था कि जब वह अचानक पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर पहुंच गए थे।

वहीं, राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाब नबी आजाद ने कहा कि भारत को नीचा दिखाने के लिए पाकिस्तान ने जाधव को सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया है। आजाद ने कहा कि सरकार जाधव को बचाने के लिए पाकिस्तान में वकील मुहैया कराए।

इस मामले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि जाधव भारत का बेटा है, उसे बचाने के लिए कुछ भी करेंगे। सुषमा ने पाक को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देती हूं कि अगर वे कुलभूषण को फांसी देते हैं तो भारत सरकार के साथ रिश्ते बिगड़ेंगे, वे इसके नतीजे भुगतने को तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि कुलभूषण के खिलाफ जासूसी करने का कोई सबूत पाकिस्तान के पास नहीं है। जाधव को बचाने के लिए भारत सरकार आउट ऑफ द वे जाकर भी मदद करेगी। सुषमा ने कहा कि हिंदुस्तान के इस बेटे को बचाने के लिए अच्छा वकील खड़ा करना तो बहुत छोटी बात है, हम राष्ट्रपति तक भी बात करेंगे।

वहीं, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि पूरे सदन में कुलभूषण को लेकर आक्रोश है, पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सजा का भारत सरकार खंडन करती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत सरकार कुछ भी करेगी, मैं विश्वास दिलाता हूं कि जाधव को न्याय मिलेगा।

असदुद्दीन ओवैसी ने पाक पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ‘बनाना’ कोर्ट है, जिसने बिना किसी सुबूत के इस मामले में अपना फैसला दिया है। ओवैसी ने लोकसभा में कहा कि सरकार को अपने प्रभाव का इस्तेमाल जाधव को सुरक्षित वापस लाने के लिए करना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने सोमवार(10 मार्च) को भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को रॉ का एजेंट बताकर मौत की सजा सुना दी। उन्हें जासूसी करने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया गया है। आनन-फानन में पाक सेनाध्यक्ष ने जाधव की सजा-ए-मौत पर मुहर भी लगा दी।

पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई सेंटर- द इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत सभी आरोपों में दोषी पाया। आईएसपीआर ने कहा कि जाधव भारतीय नौसेना के कमांडर हैं और उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

जाधव पर पाक ने आरोप लगाया है कि वह बलूचिस्तान और कराची जैसी जगहों पर अशांति फैलाकर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने और उसे अस्थिर करने की रणनीति के तहत काम कर रहे थे। पाक ने सैन्य अदालतों का गठन देश में आतंकी घटनाओं में लिप्त आतंकियों के खिलाफ जल्द सुनवाई के लिए किया था।

लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से भारतीय नागरिक जाधव के खिलाफ सैन्य कोर्ट में गुपचुप तरीके से केस चलाया गया। उन्हें बिना कोई कानूनी सहायता उपलब्ध कराए फांसी की सजा सुना दी गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को बचाव में वकील मुहैया कराया गया था।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और एक डिमार्शे दिया, जिसमें कहा गया वह कार्यवाही जिसकी वजह से जाधव के खिलाफ सजा सुनायी गई उसके खिलाफ ‘किसी ठोस सबूत के अभाव में दिखावा है।’

 

 

 

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