कोल्लम में आतिशबाजी की अनुमति न देने पर मुस्लिम अफसरों पर लगाया गया था साम्प्रदायिकता का आरोप

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केरल के कोल्लम स्थित पुत्तिंगल देवी मंदिर मे वार्षिक आयोजन के मौके पर आतिशबाजी के दौरान मारे गए कम से कम में 105 लोगों और 380 से अधिक गम्भीर रूप से घायलों की जिम्मेदारी तय करने की कोशिशों में अब नए खुलासे सामने आए हैं ।
आरोप-प्रत्यारोप और जवाबदेही के बीच जो तस्वीर निकलकर आ रही है उससे पता चलता है कि मंदिर मे आतिशबाजी की परमिशन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर मना कर दिया गया था।
कोल्लम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ए. शाइनामोल और एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ए. शाहनवाज ने मंदिर परिसर में कार्यक्रम के दौरान होने वाली आतिशबाजी को मना कर दिया था।
शनिवार दोपहर तक अतिशबाजी को लेकर असमंजस बना हुआ था। क्योंकि प्रशासन ने इसे मना कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार परमिशन कैंसल होने के बाद स्थानीय हिन्दू संगठनों ने धमकी दी और आरोप लगाया कि सांप्रदायिक मकसद के चलते आतिशबाजी की इजाजत नहीं दी गई क्योंकि दोनों ही अफसर मुस्लिम है।
चुंकि केरल में चुनावी सरगर्मिया शुरू हो चुकी है इसलिये मंदिर प्रशासन ने राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल कर लिया था। इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के अनुसार मंदिर प्रशासन को भरोसा था कि आतिशबाजी में कोई बाधा नहीं डालेगा इसलिये आतिशबाजी का फैसला ले लिया गया।
प्रशासन की ओर से आतिशबाजी पर जो बैन लगाया गया था, उसका पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस पर थी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी यहां पर तैनात थे।
मामले पर सफाई देते हुए कोल्लम के पुलिस कमिश्नर पी प्रकाश कह रहे है कि बैन सिर्फ प्रतिस्पर्धी आतिशबाजी पर था। आयोजकों ने पुलिस से गुजारिश की थी कि परम्परा के लिये थोड़ी बहुत आतिशबाजी की इजाजत दे दी जाए।
अब यहीं थोड़ी बहुत आतिशबाजी की कारगुजारी 105 से अधिक मौतों की जिम्मेदार बन गयी है।
बताया गया कि दुर्घटना के समय मंदिर परिसर में मौजूद मंदिर समिति का 15 सदस्यीय दल घटना के बाद लापता हो गया था। इस बीच पुलिस ने सुरेंद्रन नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस व्यक्ति को 15 किलोग्राम पटाखें रखने का लाईसेंस था जबकि इसने 150 किलोग्राम पटाखें अपने गोदाम में जमा किए हुए थे। फिलहाल राजनीतिक बयानबाजियों का दौर शुरू हो चुका है क्यूंकि लाशों पर राजनीति करने वाले अच्छे से जानते है कि कब क्या करना है।

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