क्या मोदी सरकार ने कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार को निशाना बनाने के लिए CBI का किया इस्तेमाल? सीएम ममता बनर्जी ने कमिश्नर को ‘ईमानदार’ करार देते हुए की आलोचना

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कोलकाता पुलिस ने रविवार (3 फरवरी) को उन खबरों को आधारहीन करार देते हुए निंदा की है जिसमें दावा किया गया था कि कमिश्नर राजीव कुमार रोज वैली और शारदा पोंजी घोटाला मामले की जांच में सीबीआई से बचने के लिए लापता हो गए हैं। दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोलकाता पुलिस कमिश्रर राजीव कुमार को चिटफंड घोटाला मामले में गिरफ्तार कर सकती है।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीबीआई कुमार का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जो रोज वैली और शारदा पोंजी घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद से कथित रूप से गायब हैं। इस संबंध में जांच एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि वह उनसे इसी तरह बचने की कोशिश करते रहेंगे तो उनकी गिरफ्तारी पर विचार किया जा सकता है।

यह खबर वायरल होने के बाद कोलकाता पुलिस ने ट्विटर पर एक बयान जारी कर कहा है कि हम शनिवार (2/2/2019) से ही यह खबर देख और पढ़ रहे हैं कि सीबीआई द्वारा कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार की तलाश की जा रही है। उन समाचारों में यह भी उल्लेख किया गया है कि वह तीन दिनों से कार्यालय नहीं जा रहे हैं। बयान में कहा गया है कि कोलकाता पुलिस ऐसी आधारहीन खबरों की निंदा करती है और उसका खंडन करती है।

कोलकाता पुलिस के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर कोलकाता शहर में केवल मौजूद ही नहीं हैं बल्कि जब से यह खबर चल रही है वह नियमित रूप से कार्यलय में उपलब्ध हैं, उन्होंने केवल एक दिन की छुट्टी ली थी। कोलकाता पुलिस ने चेतावनी दी है कि सभी संबंधित कृपया ध्यान दें कि यदि कोई भी खबर उचित सत्यापन के बिना फैली हुई है, तो कोलकाता पुलिस द्वारा मानहानि का सख्त कानूनी कार्रवाई किया जाएगा।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रोज वैली और शारदा पोंजी घोटाला मामले में कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने के लिए सीबीआई उनका पता लगाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने दावा कर दिया था कि इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है। अधिकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को यह जानकारी दी थी। रोज वैली घोटाला 15,000 करोड़ रुपये का, जबकि सारदा घोटाला 2500 करोड़ रुपये का है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घोटालों की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम का नेतृत्व करने वाले आईपीएस अधिकारी से लापता दस्तावेजों और फाइलों के सबंध में पूछताछ की जानी है, लेकिन वह जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने से संबद्ध नोटिसों का जवाब नहीं दे रहे हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को पश्चिम बंगाल की मुख्यंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।

ममता ने बताया ईमानदार अधिकारी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता पुलिस प्रमुख के बचाव में उतर आई हैं। सीएम ने एक के बाद एक दो ट्वीट आरोप लगाया है कि बीजेपी नेतृत्व विरोधी दलों को निशाना बना रही है और पुलिस को नियंत्रण में करने के लिए अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर संस्थानों को बर्बाद कर रही है। ममता ने कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं।

ममता ने अपने अधिकारी का बचाव करते हुए ट्वीट कर कहा है कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर दुनिया के सबसे अच्छे लोगों में से एक हैं। उनकी ईमानदारी और बहादुरी निर्विवाद है। वह 24×7 काम कर रहे हैं और हाल ही में केवल एक दिन की छुट्टी ली है। अब आप झूठ फैला रहे हैं, तो झूठ हमेशा झूठ ही रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक में भी शामिल नहीं हुए। आयोग के अधिकारी चुनाव की तैयारियों के संबंध में उनसे मिलने गए थे। संपर्क किए जाने पर उनके कर्मचारी ने पीटीआई से दावा किया कि कुमार शुक्रवार को कार्यालय आए, लेकिन बाद में फिर चले गए थे। उनके कार्यालय के अधिकारी ने बताया, ‘‘बहुत ही कम संभावना है कि वह अभी कार्यालय आएंगे। आप सोमवार को फोन कर सकते हैं या उनके आवास पर फोन कर लें।”

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