क्या मीडिया के दफ्तरों वाले नोएडा के फिल्म सिटी में प्राचीन हनुमान मंदिर है? जानें ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे #NoidaFilmCityExcavation के पीछे का सच

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हिंदी टीवी चैनल आज तक की एक विवादास्पद प्रोग्रामिंग हेडलाइन को लेकर एक ट्विटर यूजर ने ऐसा मजाकिया ट्वीट्स किया कि, उसके बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्व‍िटर पर #NoidaFilmCityExcavation ट्रेंड करने लग गया। यूजर के इस ट्वीट पर अब तमाम यूजर्स भी जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

आज तक

दरअसल, एक गुमनाम ट्विटर यूजर ने एक कहानी बनाया और दावा किया कि नोएडा के सेक्टर 16 में मीडिया कार्यालयों के नीचे एक विशाल हनुमान मंदिर है, जो अब जमीन के नीचे दब गया है। इसलिए अब उस क्षेत्र की खुदाई करने की आवश्यकता है। @RoftGandhi_ नाम के यूजर ने हिंदी में कई सारे ट्वीट किए। उसने अपने ट्वीट में बताया कि सेक्टर-16 में कई हज़ार साल पहले एक विशाल हनुमान मंदिर था, उस समय शहर का नाम था नवोदय। जिसे अब सेक्टर 16 A फ़िल्म सिटी बताई गई है। शायद मंदिर भूतल से लगभग 3000 मीटर नीचे है।

यूजर ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, “आज नहीं तो कल देश की जनता इसका जवाब जरूर मांगेगी। आस्था के ऊपर कुछ नहीं, न्यूज स्टूडियो तो बिल्कुल नहीं।” यूजर ने अपने इस ट्वीट के साथ #NoidaFilmCityExcavation हैशटैग का भी इस्तेमाल किया। फिर उसके बाद तमाम यूजर्स @RoftGandhi_ के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देने लग गए। जिसके बाद ट्व‍िटर पर #NoidaFilmCityExcavation ट्रेड होने लग गया है।

हैशटैग #NoidaFilmCityExcavation की लोकप्रियता के पीछे एक कारण आज तक द्वारा एक धार्मिक रूप से प्रोग्रामिंग हेडलाइन होना प्रतीत होता है, जिसका कार्यालय भी नोएडा के सेक्टर 16 A फिल्म सिटी में स्थित है। बुधवार को आज तक का प्रोग्रामिंग हेडलाइन था, “जन्मभूमि हमरी, राम हमरे, मस्जिद वाले कहां से पधारे?”

आजतक द्वारा ट्वीट की गई इस हेडलाइन की सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने निंदा की है और मांग की है कि इसे तत्काल हटा दिया जाएं। लेकिन, आजतक ने अपने इस विवादित ट्वीट को अभी तक डिलीट नहीं किया है।

 

विडंबना यह है कि आजतक का विवादित ट्वीट उस दिन आया जब समाचार प्रसारण व मानक प्राधिकरण (एनबीएसए) ने सभी टेलीविजन चैनलों को परामर्श जारी किया है कि वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में खबर देते वक्त ‘‘सतर्कता’’ बरतें और तनाव पैदा करने वाली ‘‘भड़काऊ बहसों ’’ से दूर रहें। एनबीएसए समाचार चैनलों के लिए स्व नियामक संस्था है। उनसे यह सलाह भी दी है कि अयोध्या मामले पर किसी भी समाचार में वह बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से जुड़े़ कोई फुटेज नहीं दिखाए।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को जारी दो पन्नों के परामर्श में कहा गया है कि, ‘उच्चतम न्यायालय में जारी मौजूदा सुनवाई के मद्देनजर अटकलों पर आधारित कोई प्रसारण नहीं किया जाए, इसके अलावा फैसले से पहले उसके बारे में और उसके संभावित परिणामों के बारे में भी कोई प्रसारण नहीं किया जाए जो सनसनीखेज, भड़काऊ या उकसाने वाला हो।’

इसमें समाचार चैनलों से कहा गया है कि वह उच्चतम न्यायालय में लंबित सुनवाई के संबंध में तब तक कोई समाचार प्रसारित नहीं करें जब तक कि उनके संवाददाता या संपादक ने ठीक तरह से उसकी प्रामाणिकता और सत्यता की पुष्टि मुख्य रूप से अदालत के रिकॉर्डों से या सुनवाई के दौरान खुद उपस्थित होकर नहीं कर ली हो। इसमें कहा गया है कि चैनल अयोध्या मामले में लोगों के जश्न या प्रदर्शन दिखाने वाले दृश्य प्रसारित नहीं करे।

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