दलित लड़की के गैंगरेप पर असंवेदनशील टिप्पणी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किरण बेदी से मांगा इस्तीफा

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दिल्ली के हुए निर्भया कांड की तरह ही हरियाणा के रोहतक में युवती के साथ हुए क्रूर गैंगरेप और हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने ‘बेटी बचाओ अपनी-अपनी’ के नारे को लेकर भारत की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में पुडुचेरी की उपराज्‍यपाल किरण बेदी के इस्तीफे मांग की गई है।

फाइल फोटो।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह मांग करते हुए कहा है कि ‘राजनीति ने किरण बेदी को बदल दिया’ है। सोशल कार्यकर्ता मारिया आलम उमर ने कहा कि आईपीएस अधिकारी रहीं किरण बेदी से यह उम्मीद नहीं थी। एक वरिष्ठ पद धारक होने के नाते ऐसा बयान और नारा देना उन्हें शोभा नहीं देता। क्या राजनीति किसी व्यक्ति की भाषा इस हद तक बदल सकती है कि वह नैतिक सिद्धांत ही भूल जाए। उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।

वहीं, महिलाओं के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता हिना जहीर ने बेदी के बयान को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बेदी का बयाना बताता है कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं है, लिहाजा माता-पिता को खुद ही अपनी बेटियों की सुरक्षा करनी होगी।उन्होंने कहा कि किरण बेदी क्या कहना चाहती हैं? क्या वह यह कहना चाहती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी नहीं है और माता-पिता को अपने बच्चों का ध्यान रखना चाहिए? क्या इस तरह के नारे महिला को सुरक्षा देने में मदद कर पाएंगे?

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दरअसल, किरण बेदी ने मंगलवार(16 मई) को एक कार्यक्रम में कहा कि देश के माता-पिता को अपने बेटों पर नजर रखनी चाहिए और इस बात के प्रति सतर्क होना चाहिए कि उनका बेटा किस माहौल में बड़ा हो रहा है, वह समाज के लिए एक संपत्ति बन रहा है या धब्बा बनने की दिशा में जा रहा है। बेदी ने कहा कि हरियाणा में हुए रेप व मर्डर जैसे केस यह बताते हैं कि ऐसी घटनाएं तब कर होती रहेंगी जब तक माता-पिता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ज्यादा सतर्क नहीं होंगे और बच्चों पर नजर नहीं रखेंगे।

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देश में महिला सुरक्षा के हालात पर अफसोस जताते हुए पूर्व आईपीेएएस अधिकारी बेदी ने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी बचाओ’ की जगह नया नारा ‘बेटी बचाओ अपनी-अपनी’ होना चाहिए। हालांकि, अपने एक ट्वीट में उन्होंने इस स्लोगन को बढ़ाते हुए लिखा, ‘बेटी बचाओ अपनी-अपनी’ ‘अपने-अपने बेटे को इंसान बनाओं।’

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बेदी ने कहा कि अगर इस स्लोगन को पहले ही शुरु कर दिया जाता तो रोहतक में बेटी के साथ गैंगरेप और फिर उसकी निर्मम हत्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश के माता-पिता अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभा रहे होते तो ऐसी घटनाएं नहीं होती।

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बेदी ने आगे कहा कि ऐसे में लड़के खराब लोगों की कंपनी में शामिल हो जाते हैं और माता-पिता भी उनके सामने कुछ नहीं कह पाते। उन्हें डर रहता है कि बेटा घर ना छोड़ दे, वही तो बुढ़ापे में उनका सहारा होगा। बाद में इन्हीं लोगों को बेटों से धमकियां मिलती हैं। जिन्होंने सारी जिंदगी बेटियों को कमतर समझा।

आगे पढ़ें, रोहतक में युवती से निर्भया जैसी दरिंदगी

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