विवादों में केरल के राज्यपाल का बजट भाषण, नहीं पढ़ी मोदी सरकार और RSS की आलोचना वाली टिप्पणी

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भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके केरल के राज्यपाल पी सदाशिवम विधानसभा में दिए अपने भाषण की वजह से विवादों में आ गए हैं। दरअसल, सोमवार (22 जनवरी, 2018) को राज्यपाल सदाशिवम ने बजट सत्र के पहले दिन सयुंक्त सदन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने लिखित भाषण में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आलोचना वाली टिप्पणी नहीं पढ़ी।

(Indian Express Photo Kshitij Mohan/File)

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्यपाल सदाशिवम के 89 मिनट के भाषण के बाद इसकी कॉपियां बांटी गईं, जिससे पता चला कि उन्होंने अपने भाषण में से उन तीन पंक्तियों को छोड़ दिया था, जिसमें मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना वाली टिप्पणी थी। अपने भाषण में हालांकि उन्होंने प्रदेश की पिनरई विजयन सरकार की प्रशंसा की।

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, सतशिवम संबोधन शुरू करने के लिए जैसे ही खड़े हुए, नेता प्रतिपक्ष रमेश चेनिथाला खड़े हो गए और कहा कि वह बोलना चाहते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विजयन सरकार पूरी तरह विफल हो गई है।चेनिथाला ने कहा कि सरकार कानून व्यवस्था को संभालने, खाद्य पदार्थों का मूल्य बढ़ने से रोकने और चक्रवाती तूफान ओखी के बाद की स्थितियों को संभालने समेत सभी तरह से हर मोर्चे पर विफल हो गई।

चेनिथाला के बैठने के बाद सतशिवम ने अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा कि, ‘देश में बेहतरीन कानून व व्यवस्था वाले इस राज्य के खिलाफ कुछ संप्रादायिक ताकतों ने फर्जी आधार पर पूरे भारत में एक माह तक अभियान चलाया।’ राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने केरल को देश का एकमात्र ऐसा राज्य घोषित किया है, जहां मानव विकास सूचकांक सबसे ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान राज्य के धर्मनिरपेक्ष परंपराओं पर गहरा आघात किया गया है। राज्यपाल ने प्रदेश सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि कुछ सांप्रदायिक ताकतों की ओर से कोशिश के बावजूद राज्य में सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। आपको बता दें कि वित्तमंत्री थॉमस इसाक 2 फरवरी को नए वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा तैयार और विधायकों तथा मीडिया में वितरित की गई राज्यपाल के अभिभाषण की प्रिंटिड कॉपी में केंद्र सरकार पर राज्य सरकार की अनदेखी करके सहयोगात्मक संघवाद की परंपराओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया। हालांकि, राज्यपाल सदाशिवम ने अपने अभिभाषण में इस हिस्से को नहीं पढ़ा।

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