कठुआ गैंगरेप व हत्याकांड मामला: 6 में से 3 दोषियों को उम्रकैद और अन्य तीन दोषी पुलिसकर्मियों को 5-5 साल की सजा

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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय खानाबदोश लड़की से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के सनसनीखेज मामले में तीन मुख्य आरोपियों को सोमवार (10 जून) को पठानकोट की एक विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई जबकि साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए तीन अन्य को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई। करीब 17 महीने पहले हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

अदालत में पीड़िता के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले मुबिन फारूकी के मुताबिक, करीब एक वर्ष तक मुकदमा चलने के बाद अदालत ने मामले में छह को दोषी करार दिया जबकि मुख्य षड्यंत्रकर्ता सांजी राम के बेटे विशाल जंगोतरा को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के वकील संतोख सिंह ने कहा कि जिस देवस्थानम (मंदिर) में अपराध हुआ था वहां की देखभाल करने वाले सांजी राम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और एक अन्य आरोपी परवेश कुमार को रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) के तहत आपराधिक साजिश, हत्या, अपहरण, सामूहिक बलात्कार, साक्ष्यों को नष्ट करने, पीड़िता को नशीला पदार्थ खिलाने और समान आशय के तहत अपराध को अंजाम देने का दोषी करार दिया गया।

अभियोजन ने उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष के वकील ने बताया कि तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और आपराधिक षड्यंत्र एवं हत्या के लिए उन पर एक- एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि आजीवन कारावास की सजा का मतलब है कि नैसर्गिक मृत्यु होने तक वे जेल में रहेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें आरपीसी के तहत विभिन्न अपराधों के लिए जेल की अलग अलग अवधि की सजा भी सुनाई गई जो आजीवन कारावास की सजा के साथ चलेगी।

उन्होंने बताया कि तीन सह अपराधियों- पुलिस उपनिरीक्षक आनंद दत्ता, मुख्य आरक्षक (हेड कांस्टेबल) तिलक राज और विशेष पुलिस अधिकारी सुरेन्दर वर्मा को साक्ष्य नष्ट करने के लिए पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि अगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें जेल में अतिरिक्त छह महीने कैद की सजा भुगतनी होगी।

फांसी की हो रही थी मांग

अभियोजन पक्ष के वकीलों की टीम में जे के चोपड़ा, एस एस बसरा, हरमिंदर सिंह और भूपिंदर सिंह शामिल थे। उन्होंने मुख्य आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की और विशाल को बरी किए जाने के खिलाफ वे अपील करेंगे। बयान में कहा गया है, ‘‘हत्या और सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी ठहराए गए सभी तीनों आरोपियों के लिए हमने फांसी की सजा की मांग की। यह हम सभी की कड़ी मेहनत और जांच एवं कानूनी समझ का नतीजा है। हमें 99 फीसदी परिणाम हासिल हुआ है।’’

अदालत कक्ष में सातों आरोपी मौजूद थे जहां मीडिया को जाने से रोक दिया गया था। अदालत कक्ष के अंदर मौजूद लोगों के मुताबिक फैसला सुनाए जाते ही राम और खजुरिया स्तब्ध रह गए। दोनों के परिवार के कुछ सदस्य उन्हें जेल भेजे जाने की खबर सुनकर अदालत परिसर के अंदर ही बेहोश हो गए। जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने एक किशोर सहित आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

किशोर के खिलाफ अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है क्योंकि उसकी उम्र तय करने की याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। पिछले वर्ष अप्रैल में दायर 15 पन्नों के आरोपपत्र के मुताबिक, लड़की का अपहरण पिछले वर्ष दस जनवरी को हुआ और गांव के एक छोटे मंदिर में उसे चार दिनों तक नशीला पदार्थ देकर उससे बलात्कार किया गया। मंदिर की देखरेख सांजी राम करता था। बाद में लड़की की हत्या कर दी गई।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सजा का स्वागत किया लेकिन कहा कि वह सभी छह दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को ऊपरी अदालत में अपील करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सात मई 2018 को आदेश दिया था कि मामले को जम्मू-कश्मीर के बाहर भेजा जाए जिसके बाद इसे जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से करीब 30 किलोमीटर दूर पंजाब के पठानकोट के जिला एवं सत्र न्यायालय में पिछले वर्ष जुलाई के पहले हफ्ते में भेजा गया। मामले की अदालत में रोजाना सुनवाई हुई।

6 आरोपी दोषी करार

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के रसाना इलाके में खानाबदोश समुदाय की आठ साल की एक बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। पठानकोट अदालत ने सोमवार (10 जून) को मामले के सात आरोपियों में से छह को दोषी ठहराया और एक को बरी कर दिया। मुख्य आरोपी सांजीराम के बेटे एवं सातवें आरोपी विशाल को बरी कर दिया गया है।

पीड़िता के परिवार के वकील फारुकी खान ने कहा, ‘‘अदालत ने छह लोगों को दोषी करार दिया है। एक आरोपी, सांजीराम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया है।’’ सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सात मई 2018 को कठुआ से पंजाब के पठानकोट में स्थानांतरित कर दिया था। मामले की बंद कमरे में हुई सुनवाई तीन जून को पूरी हुई थी। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

मंदिर में बनाया था बंधक

पंद्रह पृष्ठों के आरोपपत्र के अनुसार, पिछले साल 10 जनवरी को अगवा की गई आठ साल की मासूम बच्ची को कठुआ जिले में एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया और उससे दुष्कर्म किया गया। उसे जान से मारने से पहले उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया। जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट में जिला एवं सत्र अदालत ने पिछले साल जून के पहले सप्ताह में इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जम्मू कश्मीर से बाहर करने का आदेश दिया था।

जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें गांव का मुखिया सांजीराम और दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया तथा सुरेंद्र वर्मा शामिल हैं। मामले में हेड कांस्टेबल तिलकराज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता को भी दोषी ठहराया गया है जिन पर सांजीराम से चार लाख रुपये लेने और अहम सबूत नष्ट करने का आरोप था। बच्ची का शव पिछले साल 17 जनवरी को मिला था और पोस्टमार्टम में बच्ची से सामूहिक बलात्कार और हत्या की पुष्टि हुई। अभियोजन के अनुसार अदालत ने धाराओं 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 302 (हत्या) और 376-डी (सामूहिक बलात्कार) समेत रणबीर दंड संहिता के तहत आरोप तय किए थे।

 

 

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