कासगंज हिंसा: रास्ता पूछा तो दाढ़ी देख अकरम हबीब पर टूट पड़े दंगाई, गई एक आंख की रोशनी

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उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में शुक्रवार(26 जनवरी) को गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदायों में भिड़ंत हो गई जिससे तनाव व्याप्त हो गया। इस दौरान दोनों समुदायों की और से जमकर पथराव और आगजनी की गई। इस हिंसा में एक युवक की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए।

Photo: Indian Express

जनसत्ता.कॉम की ख़बर के मुताबिक, इस हिंसा में बी.कॉम फाइनल ईयर का छात्र अभिषेक गुप्‍ता (22) की मौत हो गई। दूसरी तरफ, लखीमपुर-खीरी में हार्डवेयर स्‍टोर चलाने वाले 35 वर्षीय अकरम हबीब को हिंसा में अपनी एक आंख गंवानी पड़ी। अकरम हबीब अपनी बेटी को दोनों आंखों से देख नहीं सके, जो हिंसा के अगले दिन इस दुनिया में आई।

अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल में अपनी चोट सहला रहे 35 वर्षीय अकरम हबीब गणतंत्र दिवस के दिन कासगंज अपनी ससुराल आया था क्‍योंकि उसकी पत्‍नी अनम (27) की अगले दिन डिलीवरी होनी थी। हिंसा के बाद, उन्‍होंने अपनी कार में गांव के रास्‍ते निकलने की सोची ताकि भीड़ से सामना न हो।

जनसत्ता.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, अकरम हबीब ने बताया कि मैंने कुछ लोगों से रास्‍ता पूछा। उन्‍होंने मेरी दाढ़ी देखी और मुझे मुसलमान जानकार पत्‍थरों और लाठियों से बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। मेरे सिर पर बंदूक रख दी। उन्‍होंने मेरी जान केवल इसलिए बख्‍श दी क्‍योंकि उन्‍हें मेरी गर्भवती बीवी और मुझ पर तरस आ गया। वह (अनम) इस दौरान चिल्‍लाती रही। हबीब ने दावा किया कि पुलिस ने मदद नहीं की और उसे घायल होने के बावजूद अपनी पत्‍नी को खुद कार चलाकर अस्‍पताल पहुंचाना पड़ा।

हबीब ने आगे कहा कि, मैंने कार की खिड़की के बाहर सिर निकाला और गाड़ी चलाने लगा, मुझे बड़ी मुश्किल से कुछ दिख रहा था। उस समय, मैं बस अपनी पत्‍नी को सही-सलामत बाहर निकाल ले जाना चाहता था। हबीब से उनकी बेटी के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि, मैं खुश हूं कि मैं उसका चेहरा देख सका और कुछ मायने नहीं रखता। मैं उनके लिए भी बद्दुआ नहीं देता जिन्‍होंने मुझ पर हमला किया।

अकरम हबीब ने सुनाई आपबीती :

कासगंज हिंसा में एक आंख की रोशनी को खो चुके अकरम हबीब ने सुनाई अपनी आपबीती

कासगंज हिंसा में एक आंख की रोशनी को खो चुके अकरम हबीब ने सुनाई अपनी आपबीती, बताया कैसे दंगाइयों ने उन पर हमला किया था।

Posted by जनता का रिपोर्टर on Sunday, January 28, 2018

वहीं, दूसरी और जनसत्ता.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, कासगंज हिंसा में मारे गए अभिषेक गुप्‍ता के पिता सुशील गुप्‍ता रविवार (28 जनवरी) को अपने घर के बाहर बैठ टीवी चैनल्‍स की कॉल्‍स का जवाब देते रहे। उनके घर नेता आते-जाते रहे। एक हाथ में बेटे की तस्‍वीर थी, जो पढ़ाई के लिए यूपी से बाहर जाने की तैयारी कर रहा था।

किसी दक्षिणपंथी संगठन से अभिषेक के जुड़ाव से इनकार करते हुए सुशील गुप्‍ता ने कहा कि, तीन बच्‍चों में सबसे छोटा था, मगर बिगड़ैल नहीं था। वह सोशल वर्क में एक्टिव था और अभी इधर एक एनजीओ शुरू कर लोगों की मदद कर रहा था।

 

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