कर्नाटक सियासी संकट: इस्तीफा स्वीकार न होने से नाराज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस-JDS के बागी विधायक, बोले- स्पीकर जानबूझकर कर रहे हैं देरी

0

कर्नाटक सियासी संकट का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। कर्नाटक में चल रहा राजनीतिक संकट बुधवार को उस समय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया जब कांग्रेस और जद (एस) के 10 बागी विधायकों ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की। कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल-सेकुलर (जद-एस) के बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करने के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और मामले की तत्काल सुनवाई करने की मांग की है।

PTI

इन विधायकों ने याचिका में विधानसभा अध्यक्ष पर जानबूझ कर उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इन विधायकों की याचिका का उल्लेख किया और इसे शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। पीठ ने मुकुल रोहतगी को भरोसा दिलाया कि वह यह देखेगी कि क्या शीघ्र सुनवाई के लिए यह याचिका कल सूचीबद्ध की जा सकती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के माध्यम से दायर अपनी याचिका में बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार अपना संवैधानिक कर्तव्य नहीं निभा रहे हैं और जानबूझ कर उनका इस्तीफा स्वीकार करने में देरी कर रहे हैं। रोहतगी ने कहा कि ये विधायक पहले ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं और अब नए सिरे से चुनाव लड़ना चाहते हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने रोहतगी को आश्वासन दिया कि याचिका पर सुनवाई की जाएगी लेकिन बाद में किसी अन्य तारीख पर।

कर्नाटक विधानसभा के 13 सदस्यों (कांग्रेस के 10 और जद(एस) के तीन) ने छह जुलाई को सदन की सदस्यता से अपने अपने त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को सौंपे थे। इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के लिए राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। इसी बीच, कांग्रेस के एक अन्य विधायक आर रोशन बेग ने भी मंगलवार को इस्तीफा दे दिया।

स्पीकर ने फंसाया पेंच

दरअसल, कर्नाटक में बदलते परिदृश्य में अब सभी की निगाहें विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार पर टिकी हुई हैं, जिन्हें कांग्रेस और जद (एस) के कुल 13 विधायकों के विधानसभा से इस्तीफे पर फैसला लेना है। इस बीच कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (एस) के 13 विधायकों के इस्तीफे पर विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा था कि 13 में 8 विधायकों के इस्तीफे कानून के मुताबिक नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पीकर ने बागी विधायकों के इस्तीफे त्रुटिपूर्ण पाए हैं और उन्होंने सम्मन कर उनसे इस्तीफे पर स्पष्टीकरण मांगा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके कार्यालय में भेजा गया इस्तीफा स्वीकृत होगा, इस पर कुमार ने संकेत दिया कि विधायकों को अपना इस्तीफा उनसे मिलकर निजी तौर पर देना चाहिए। स्पीकर ने कहा कि वह नियमावली पुस्तिका का पालन करेंगे और इन गतिविधियों के बारे में वरिष्ठों से परामर्श करेंगे कि इन इस्तीफों को स्वीकार करना चाहिए या अन्य तरह की कार्रवाई करनी चाहिए। स्पीकर के इस कदम से कर्नाटक का संकट गहरा गया है और साथ ही इन विधायकों के इस्तीफे को लेकर संशय भी।

काफी अहम हैं बागी विधायक

12 जुलाई को होने वाले विधानसभा सत्र से पहले इस्तीफा पत्रों पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की काफी अहमियत है, क्योंकि यह एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली डांवाडोल गठबंधन सरकार का भविष्य तय करेगी। 224 सदस्यीय विधानसभा में दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ भाजपा के पास 107 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 113 है। अगर इन 13 विधायकों का इस्तीफे स्वीकार कर लिया जाता है, तो गठबंधन का आंकड़ा घटकर 103 हो जाएगा। इसमें विधानसभा अध्यक्ष का भी एक वोट शामिल है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here