महाभियोग प्रक्रिया में शामिल कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा CJI दीपक मिश्रा की कोर्ट में नहीं कर सकेंगे वकालत

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार (31 मार्च) को सांसदों एवं विधायकों को वकीलों के रूप में काम करने की मंजूरी देने का फैसला किया। हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी लगाई गई है। बीसीआई ने कहा कि उच्च न्यायपालिका के किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले को उस अदालत में वकालत करने की मंजूरी नहीं होगी।

बीसीआई के प्रमुख एवं वरिष्ठ वकील मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल ने ‘अधिकारों के दुरुपयोग’ और किसी सांसद नहीं बल्कि वकीलों के ‘विशेषाधिकारों’ पर रोक लगाने के लिए यह फैसला लिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने में जुटे कांग्रेस और विपक्ष के कई नेताओं को बीसीआई के इस फैसले से झटका लगा है।

जब बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा से ये पूछा गया कि क्या चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई में अगर कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा हिस्सा लेते हैं तो उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। तो मनन मिश्रा का कहना था- हां। उन्होंने कहा है कि अगर ऐसे कोई सांसद किसी जज के खिलाफ महाभियोग लाने में शामिल होते हैं, तो उन्हें उस कोर्ट में वकालत करने की अनुमित नहीं दी जाएगी।

काउंसिल के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस के प्रस्ताव पर राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा महाभियोग की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे। बता दें कि कांग्रेस नेता सांसद कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी, पी. चिदंबरम समेत बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और सांसद मीनाक्षी लेखी सहित दूसरी पार्टियों के भी नेता कोर्ट प्रैक्टिस भी करते रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मनन मिश्रा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, ‘बीसीआई इस अंतिम निष्कर्ष पर पहुंची है कि हम सांसदों, विधायकों को अदालतों में वकालत करने से रोक नहीं सकते या उन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते, लेकिन इसे लेकर एक अपवाद है। वकील-सांसद या वकील-विधायक, अगर वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग या पद से हटाने की कार्यवाही का प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें उस खास अदालत में वकालत करने की मंजूरी नहीं होगी। यह काउंसिल के अधिकतर सदस्यों का रूख है।’

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका को लेकर 12 मार्च को बीसीआई से जवाब मांगा था। याचिका में सांसदों या विधायकों के वकीलों के रूप में काम करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। बता दें कि देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस राज्यसभा में इस प्रस्ताव को मंजूरी न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक यदि उप-राष्ट्रपति की ओर से महाभियोग प्रस्ताव को खारिज किया जाता है तो फिर पार्टी शीर्ष अदालत का रुख करेगी। सोमवार को कांग्रेस की ओर से राज्यसभा चेयरमैन के समक्ष चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।

 

 

 

 

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