BJP नेता ने फिर दिया विवादित बयान, कहा- ‘कर्ज से नहीं निजी कारणों से किसानों ने की खुदकुशी’

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मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग के दौरान छह किसानों की मौत पर सियासी संग्राम जारी है। किसानों की मौत पर विवाद अभी थमा ही नहीं था कि 24 घंटे के भीतर दो किसानों की खुदकुशी ने शिवराज सरकार को हिला कर रख दिया है।

फाइल फोटो: HT

होशंगाबाद के सिओनी माल्वा इलाके में 68 साल के माखन लाल डिंगोलिया नाम के एक किसान ने खुद को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव आज पेड़ से लटका मिला। वहीं, सीएम शिवराज के गृह जिले सिहोर में एक किसान ने आर्थिक तंगी के कारण कीटनाशक दवा पीकर आत्महत्या कर ली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रेहटी तहसील में आने वाले ग्राम जाजना में दुलचंल (55) ने रविवार को अपने घर में कीटनाशक दवा पीकर आत्महत्या कर ली। दोनों किसानों की खुदकुशी की वजह कर्ज को बताया जा रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने कर्ज को खुदकुशी की वजह मानने से इनकार कर दिया।

न्यूज चैनल आज तक से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनके सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश में एक भी किसान ऐसा नहीं है, जिसने कर्ज की वजह से आत्महत्या की हो। विजयवर्गीय ने कहा कि किसानों की खुदकुशी की तमाम वजहें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी निजी समस्या और डिप्रेशन की वजह से भी खुदकुशी कर सकते हैं।

विजयवर्गीय ने कहा कि जो आत्महत्या किसानों ने की है उन पर कोई किसान कर्ज नहीं था। उन्होंने निजी काम के लिए कर्ज लिया है। मेरे सूत्रों ने जानकारी दी है कि जो मौत हुई है वह निजी कारण है ना कि किसान कर्ज। इनकी आत्महत्या के लिए निजी कारण हो सकते हैं, परिवारिक कारण हो सकता है, डिप्रेशन में जाने के कारण हो सकते हैं।

पहले भी दिया था विवादित बयान

बता दें कि इससे पहले भी कैलाश विजयवर्गीय ने किसानों की मौत को लेकर विवादित बयान दिया था। टाइम्स नाउ से बातचीत में विजयवर्गीय ने कहा था कि पुलिस गोलीबारी में 5 किसानों की मौत कोई ‘बड़ा मुद्दा’ नहीं है। किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को लेकर रिपोर्टर के वाल के जवाब में विजयवर्गीय ने कहा था, “यह आप के लिए बड़ा लग रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश एक बहुत बड़ा राज्य है। उन्होंने कहा कि यदि 3-4 जिलों में घटना घट जाए तो यह कोई बड़ी बात नहीं है।’

6 किसानों की मौत

बता दें कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे। इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्य प्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, 8 जून को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में किसानों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।
शिवराज ने तोड़ा अनशन
राज्य में एक जून से 10 जून तक चले किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 6 लोगों की मौत के बाद सूबे में शांति के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद 10 जून को उपवास पर बैठ गए थे। जिसके बाद अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन बाद 11 जून को उपवास तोड़ दिया।
10 दिन तक चला आंदोलन
 

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने 1 जून को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों ने हड़ताल शुरू कर दी। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन चला था।

(देखें वीडियो)

 

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