उत्तर प्रदेश में नवजातों की मौत कमीशन के लिए किया गया ‘मानव निर्मित नरसंहार’: डॉ कफील खान

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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में हुई 60 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किए गए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील खान ने मंगलवार (29 अक्टूबर) को इस त्रासदी को 10 फीसदी कमीशन नहीं मिलने से हुआ ‘नरसंहार’ करार दिया। कफील ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा।

कफील खान
फोटो: सोशल मीडिया

बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत की घटना ने देश को हिला दिया था। अस्पताल में वर्ष 2017 में 10 अगस्त की रात 30 बच्चों की मौत हुई और इसके बाद के दिनों में 34 और बच्चों की मौत हुई। इनमें से ज्यादातर बच्चों की मौत कथित तौर पर आक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से हुई जो कि आपूर्तिकर्ता को उसका पैसा नहीं मिलने से रुकी जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने जापानी इन्सेफेलाइटिस को मौतों का कारण बताया था। सरकार द्वारा संचालित अस्पताल के तत्कालीन बाल रोग विशेषज्ञ खान को लापरवाही का आरोपी पाया गया। खान को इस मामले में निलंबित किया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर कफील खान ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह नरसंहार सिर्फ 10 प्रतिशत कमीशन के लिए हुआ था। यह कोई त्रासदी नहीं थी, यह मानव निर्मित नरसंहार था।’’ उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए मैं जल्द ही इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करुंगा। मुझे न्यायपालिका और संविधान के प्रति अपार सम्मान है। फिलहाल, जमानत पर चल रहे खान ने आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि 13 अगस्त 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझसे कहा था, ‘मैं तुम्हे देख लूंगा।’

उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार ने भुगतान के लिए मुख्यमंत्री योगी सहित 14 पत्र लिखे थे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता से 10 प्रतिशत कमीशन हासिल करने को लेकर यह नरसंहार हुआ। उन्होंने कहा कि, यह आश्चर्य की बात है कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की जांच, जिसकी रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई, के बावजूद दो साल बाद भी इन मौतों को लेकर जिम्मेदारी तय नहीं की गई।

इस त्रासदी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निलंबित किए गए और आठ माह तक जेल में रहने वाले डॉ खान ने दावा किया कि प्रमुख सचिव की जांच में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। उप्र प्रमुख सचिव (स्टांप ए‍वं रजिस्ट्रेशन) हिमांशु कुमार ने इस मामले में जांच की थी। डॉ खान ने आरोप लगाया कि मुझे बलि का बकरा बनाया गया जबकि असली दोषियों को बचाया गया है। मेरे जेल में रहने के दौरान मेरी पत्नी को कानून लागू करने वालों ने प्रताड़ित किया। मेरे साथ आठ और लोग भी पीड़ित हुए हैं।

डॉ खान ने कहा कि मेरे भाई को चार गोलियां मारकर घायल किया गया। उन्होंने (हमलावरों ने) उसे मेरे लिए गलत समझा। उन्होंने कहा कि अब मेरी लड़ाई उन 70 बच्चों को न्याय दिलाने के लिये है जो मारे गए। मरने वाले शिशु किसी एक समुदाय से नहीं थे। वे गरीब, दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक थे।

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