जज लोया मौत मामला: अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सभी मामलों की सुनवाई, अमित शाह के जिक्र पर पीठ ने जताई आपत्ति

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गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के दिवंगत न्यायाधीश बृजगोपाल हरकिशन लोया की कथित रहस्यमय मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 जनवरी) को बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बांबे हाई कोर्ट से कहा कि वो इस मामले मे कोई भी याचिका नही सुनेगा। Loyaन्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने बंबई हाई कोर्ट में लंबित सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ कांड की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की 2014 में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत की निष्पक्ष जांच के लिये दायर दो याचिकायें सोमवार को अपने यहां स्थानांतरित कर ली।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने संबंधित पक्षों से कहा कि लोया की मृत्यु से संबंधित वे सारे दस्तावेज जो अभी तक दाखिल नहीं किये गये हैं, उनकी विवरणिका पेश की जाए। कोर्ट इन दस्तावेज का, सुनवाई की अगली तारीख दो फरवरी को अवलोकन करेगा।

पीठ ने दो याचिकाओं में उठाये गये मुद्दों को ‘गंभीर’ बताते हुये कहा कि, ‘‘हमें सारे दस्तावेज बहुत ही गंभीरता से देखने चाहिए।’’ इस बीच, पीठ ने सभी हाई कोर्टों से कहा कि लोया की मौत के संबंध में दायर किसी भी याचिका पर वे विचार नहीं करें।

भाषा के मुताबिक, इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ उस समय नाराज हो गई, जब बंबई लायर्स एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष अमित शाह का नाम लेते हुये आरोप लगाया कि सब कुछ उन्हें को बचाने के लिये किया गया है। इस एसोसिएशन ने ही बंबई हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के कड़े प्रतिवाद पर विचार के दौरान ही पीठ ने इस पर कड़ी आपत्ति करते हुये कहा कि आज की स्थिति के अनुसार यह स्वाभाविक मौत है। फिर आक्षेप मत लगाईए।सुनवाई के दौरान एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने संभावित भावी आदेश का निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि शीर्ष अदालत इस मामले में मीडिया पर अंकुश लगा सकता है।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने अपनी नाराजगी वयक्त की और कहा कि, ‘‘मेरे प्रति यह न्याय संगत नहीं है। आप ऐसा नहीं कर सकतीं।’’ इसके साथ ही उन्होंने इन्दिरा जयसिंह से कहा कि वह अपने शब्द वापस लें और इसके लिये माफी मांगे। इन्दिरा जयसिंह ने अपना बयान वापस लेने के साथ ही क्षमा याचना कर ली।

बता दें कि इससे पहले, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था और कहा कि इन्हें उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। ये याचिकायें कांग्रेस के तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के पत्रकार बी एस लोने ने दायर की हैं।

इस आदेश के बाद ही दोनों याचिकायें सोमवार को प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुयीं थीं।बता दें कि विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की एक दिसंबर, 2014 को उस समय अचानक हृदयगति रूक जाने से मृत्यु हो गयी थी, जब वह अपने एक सहयोगी न्यायाधीश की पुत्री के विवाह में शामिल होने गए थे।

मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया था। यह मामला इसलिए सुर्खियों में है, क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मामले के एक आरोपी थे। हालांकि, शाह को बाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने शोहराबुद्दीन शेख मामले में बरी कर दिया था।

शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी की प्रेस कांप्रेंस में जिन विषयों को उठाया था उसमे लोया का मामला भी शामिल था।

 

 

 

 

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