जस्टिस चेलमेश्वर ने CJI दीपक मिश्रा को लिखा पत्र, कहा- कोलेजियम जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा केंद्र को भेजे

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सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए कोलेजियम (जजों की कमिटी) की सिफारिश के बाद भी उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ के नाम पर केंद्र सरकार की मंजूरी को लंबित रखने पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। पिछले दिनों चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों में से एक जस्टिस जे चेलमेश्‍वर ने गुरुवार (10 मई) को शीर्ष अदालत के लिए जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा केंद्र सरकार के पास भेजने और इसके लिए कोलेजियम की बैठक जल्द बुलाए जाने की मांग की है।

File Photo: Ravi Choudhary/PTI

समाचार एजेंसी PTI के हवाले से NBT में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जज चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कोलेजियम की बैठक बुलाने को कहा है, जिससे उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के नाम की केंद्र से दोबारा सिफारिश की जा सके। बता दें कि सरकार ने 26 अप्रैल को जस्टिस जोसेफ को प्रमोट करने की कोलेजियम की सिफारिश को ठुकरा दिया था।

केंद्र ने इस प्रस्ताव पर कहा था कि यह टॉप कोर्ट के पैरामीटर्स के तहत नहीं है और सर्वोच्च अदालत में केरल से पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, जहां से वह आते हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को यह कहते हुए पुनर्विचार के लिए भेज दिया कि उनकी नियुक्ति ‘उचित’ नहीं होगी।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर प्रमोशन के लिए जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता पर भी सवाल उठाए थे। इस बीच, जस्टिस चेलमेश्वर ने यह पत्र लिखा है। रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार शाम को CJI को भेजे पत्र में जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस जोसेफ को टॉप कोर्ट के जज के तौर पर प्रमोट करने के अपने फैसले को दोहराया है, क्योंकि 10 जनवरी को कोलेजियम द्वारा सरकार को की गई सिफारिश के बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है।

जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस जोसेफ के प्रमोशन पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा खड़े किए गए सभी पॉइंट्स का जवाब CJI को भेजे अपने पत्र में दिया है। कोलेजियम की बैठक बुधवार को ही होनी थी लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर छुट्टी पर हैं। CJI और जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा कलीजियम के दूसरे सदस्यों में जस्टिस रंजन गोगोई, एमबी लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल हैं।

जस्टिस कुरियन जोसेफ ने पिछले हफ्ते केरल दौरे के समय कथिततौर पर साफ कर दिया था कि वह उत्तराखंड के चीफ जस्टिस जोसेफ के मसले पर कोलेजियम द्वारा दोबारा सिफारिश भेजे जाने के पक्ष में हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि कोलेजियम की बैठक कब होगी। अधिकारी ने बताया कि कोई दूसरा अजेंडा नहीं है, केवल केंद्र द्वारा जस्टिस जोसेफ की सिफारिश लौटाने पर बात होनी है, ऐसे में यह CJI पर है कि वह मीटिंग की तारीख कब रखते हैं।

गौरतलब है कि जस्टिस चेलमेश्वर ने सेवानिवृत्त होने के अवसर पर उनके सम्मान में 18 मई को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित किए जा रहे विदाई कार्यक्रम का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उनका निमंत्रण अस्वीकार कर दिया। बता दें कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर 22 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

बता दें कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों (जस्टिस जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, एम. बी. लोकुर और कुरियन जोसफ) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मुद्दों को उठाया था, जिनमें अहम और संवेदनशील जनहित याचिकाओं के आवंटन का मुद्दा भी शामिल था। जजों ने सीजेआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वह अहम मामलों को ‘पसंद की बेंचों’ में भेज रहे हैं।

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के नेतृत्व में न्यायाधीशों की प्रेस कांफ्रेस में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर लगाये गए आरोपों के बाद से ही वे विवादों में घिरे हुए हैं। इस प्रेस कांफ्रेंस में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भी हिस्सा लिया था।

 

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