दिवंगत जस्टिस लोया की रहस्यमय मौत मामले में सनसनीखेज खुलासा, सहपाठी और जिगरी दोस्त ने कहा- ‘न्यायमूर्ति मोहित शाह के भारी दबाव में थे जज लोया’

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गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के दिवंगत न्यायाधीश बृजगोपाल लोया की रहस्यमय मौत मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दरअसल कॉलेज में जस्टिस लोया के सहपाठी और न्यायालय में सहकर्मी रहे एक जिगरी दोस्त ने बताया है कि जज लोया मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मोहित शाह के भारी दबाव में थे।

बता दें कि गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ मामले की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश लोया की 1 नवंबर 2014 में नागपुर में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान जस्टिस लोया के सबसे करीबी मित्र और जिला न्यायालय में सहकर्मी रहे उदय गावारे ने कारवां पत्रिका को बताया है कि, “2014 में जस्टिस बृजमोहन हरकिशन लोया दिवाली की छुट्टी के दौरान लातूर गए थे। इस दौरान वह अपने गांव भी गए थे उस वक्त अदालत में उनसे हमारी मुलाकात हुई थी।

उदय गावारे ने कहा कि उस दौरान उन्होंने (जस्टिस लोया) सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई के बारे में बात की थी। गावारे का दावा है कि इस मामले की वजह से वह काफी दबाव में थे। वह उस वक्त इतना तनाव में थे कि उन्होंने लोगों से बात तक करना बंद कर दिया था। गावारे ने कहा कि मैंने जस्टिस लोया को पहली बार उतना दबाव में देखा था।

उदय गावारे के मुताबिक जस्टिस लोया ने उनसे उस वक्त बताया था कि वह जिस मामले को देख रहे हैं वह एक बहुत ही हाई प्रोफाइल वाला मामला है। उनके पास इस केस से जुड़े कई अहम सबूत हैं लेकिन वह बहुत ज्यादा दबाव का सामना कर रहे हैं। गावारे कहते हैं कि जस्टिस लोया ने उनसे बताया था कि, “चीफ जस्टिस मोहित शाह (उस वक्त के बांम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश) उन पर इस मामले में आरोपियों के पक्ष में फैसला देने के लिए दबाव डाल रहे हैं।“

गावारे के अनुसार जस्टिस लोया एक उत्साही, हंसमुख और ईमानदार युवा थे, जो अन्याय के खिलाफ थे। लेकिन केस के दबाव में वह इतना ज्यादा विचलित हो गए थे कि वह इस्तीफा देना चाहते थे। उन्होंने गावारे से कहा था कि मैं नौकरी छोड़कर गांव में आकर खेती करूंगा, लेकिन किसी भी कीमत पर गलत फैसला नहीं दूंगा।

(आप नीचे वीडियो क्लिक कर गावारे का पूरा इंटरव्यू देख सकते हैं:-

गौरतलब है कि पिछले दिनों जस्टिस वृजगोपाल लोया की बहन अनुराधा बियानी ने कारवां की रिपोर्टर को बताया था कि उनके भाई और उस समय के CBI जज लोया को मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। इस घूस की पेशकश सभी आरोपियों को क्लीन चीट देने के लिए की गई थी। अनुराधा ने पत्रिका को बताया था कि यह ऑफर उनके भाई की मौत के कुछ हफ्ते पहले ही दिया गया था।

बहन के अलावा मृतक सीबीआई जज लोया के पिता ने भी मैगजीन से बातचीत में दावा किया था कि इस मामले में उनके बेटे को आरोपियों के अनुकूल फैसला सुनाने के लिए पैसे के साथ-साथ मुंबई में एक घर देने की भी पेशकश की गई थी। बता दें कि मृतक जस्टिस लोया की मौत के 29 दिन बाद यानी 30 दिसंबर 2014 को आए दूसरे जज ने अमित शाह को सोहराबुद्दीन हत्याकांड के इस चर्चित केस से बरी कर दिया था।

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