पत्रकार प्रशांत कनौजिया लखनऊ जेल से रिहा, सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में किया गया था गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ पर कथित विवादित टिप्पणी लिखने के मामले में गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत कनौजिया को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार (12 जून) को लखनऊ जेल से रिहा कर दिया गया। जेल की सलाखों के पीछे चार रातें गुजारने वाले कनौजिया को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए बीते सप्ताह शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। जेल के गेट से बाहर निकले कनौजिया ने टीशर्ट पहन रखी थी, जिस पर ‘देश भक्त’ लिखा हुआ था।

प्रशांत कनौजिया
फाइल फोटो

इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने बुधवार को पत्रकार प्रशांत कनौजिया की रिहाई का आदेश लखनऊ जेल भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही कनौजिया की तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रभारी) संजय कुमार ने बीस बीस हजार रूपये की दो जमानत राशि और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर पत्रकार कनौजिया को रिहा करने का निर्देश दिया।

जमानत राशि और निजी मुचलका भरे जाने के बाद अदालत द्वारा पत्रकार की रिहाई का आदेश जेल भेजा गया। इससे पहले सीजेएम की अदालत में उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रमाणित कापी दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकार प्रशांत कनौजिया को तत्काल जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुये कहा था कि संविधान में प्रदत्त स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार पवित्र है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता।

इस पत्रकार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। शीर्ष अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि कनौजिया को जमानत देने का अर्थ उसकी पोस्ट या ट्वीट को स्वीकृति देना नहीं निकाला जा सकता।

न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अवकाशकालीन पीठ ने कनौजिया की पत्नी जगीशा अरोड़ा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। जगीशा ने उसकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। (इंपुट: भाषा के साथ)

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