मिर्जापुर ‘मिड डे मील’ वीडियो मामला: अपने खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद पत्रकार पवन जायसवाल ने जारी किया अपना वीडियो, बताया कैसे की थी स्टोरी

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पिछले महीने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्‍लॉक के सियूर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करने वाले करीब 100 बच्‍चों को ‘मिड-डे मील’ के नाम पर नमक और रोटी बांटा गया था। इस मामले का एक वीडियो भी सामने आया था, जो खूब वायरल भी हुआ था। ‘मिड-डे मील’ में नमक-रोटी देने का यह मामला अब सुर्खियों में बना हुआ है। नमक-रोटी देने के मामले में जिला प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई के बजाय उस स्थानीय पत्रकार के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कराया है जिसने इसका वीडियो बनाया था।

पुलिस ने इस मामले में स्थानीय पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ साजिश करने के तहत एफआईआर दर्ज किया है। पत्रकार समेत 3 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पत्रकार पवन जायसवाल ने एक वीडियो जारी कर खुद बताया कि उसने किस तरह से इस स्टोरी को अंजाम दिया था। पवन ने कहा कि वह तो केवल खबर के लिए स्कूल गए थे जो कि उनकी ड्यूटी थी। जाने से पहले उन्होंने असिस्टेंट बेसिक शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) ब्रजेश सिंह को फोन करके सूचना भी दी थी।

पवन जायसवाल

पत्रकार ने अपने वीडियो में कहा, मिर्जापुर के ब्लॉक जमालपुर में स्थित शिउर प्राथमिक विद्यालय को लेकर हमें कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि यहां छात्रों को मिड-डे मील में नमक रोटी और नमक चावल दिया जा रहा है। इसके बाद हम 22 अगस्त को फोन पर मिली जानकारी के अनुसार वहां गया। जाने से पहले मैंने एबीएसए ब्रजेश कुमार सिंह को मेरे वहां जाने की अग्रिम सूचना भी दी थी। जाने के बाद मैंने 12.07 मिनट पर एक वीडियो शूट किया जिसमें मैंने देखा कि बच्चे नमक-रोटी खा रहे हैं।

पत्रकार ने आगे कहा, वीडियो बनाने के बाद मैंने जिला स्तर पर काम कर रहे पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने डीएम को बताया तो उन्होंने खबर प्रसारित होने से पहले ही मेरी सूचना के आधार पर वहां जाकर जांच की और तुरंत कई लोगों को निलंबित किया। इसके बाद ये मामला हाईप्रोफाइल हो गया। जिला प्रशासन ने अपनी किरकिरी होते देख हमारे ऊपर ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज कर दिए। उसमें एक भी बात हमारी तरफ से नहीं कही गई, मैंने हर चीज की जानकारी दी थी।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, FIR में कहा गया है कि वीडियो एक स्थानीय पत्रकार ने शूट किया था, जो ‘जनसंदेश टाइम्स’ के लिए काम करता है, तथा उसे फिर समाचार एजेंसी ANI को फॉरवर्ड कर दिया गया। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया गया तथा राज्य सरकार की बदनामी हुई। पत्रकार तथा गाम प्रधान के प्रतिनिधि पर धोखाधड़ी तथा आपराधिक साज़िश रचने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल, स्‍थानीय पत्रकार पवन जायसवाल और एक अन्‍य के खिलाफ केस दर्ज किया है। उधर, इस मामले में बीएसए प्रियंका निरंजन का कहना है कि एफआईआर की कार्रवाई फोन के विवरण के आधार पर की गई है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने जानबूझकर सब्‍जी नहीं मंगवाया और अपने एक परिचित को बुलाकर व‍ीडियो बनवा लिया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूल ड्रेस पहने बच्चे विद्यालय के बरामदे में फर्श पर बैठे हैं और उनके थाली में उन्‍हें मिड-डे मील के रूप में नमक और रोटी दी गई है। मासूम बच्‍चे इच्‍छा नहीं होने के बावजूद नमक और रोटी खाने के लिए मजबूर दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की पत्रकार के खिलाफ की गई इस कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने जब इस मामले को लेकर मिर्जापुर के डीएम से संपर्क करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं को सका। वहीं, मिर्जापुर के SP अवधेश कुमार पांडेय (Awadhesh Kumar Pandey) से कहा कि इस मामले की जांच करने के बाद पता चला है कि सरकार को बदनाम करने के लिए यह वीडियो वायरल किया गया। इसी के तहत इन तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह जांच डीएम के आदेश पर की गई थी। इसके अलावा उन्होंने कोई और जानकारी से मना कर दिया है।

प्रियंका गांधी ने कसा था तंज

इस मामले को लेकर देशभर में यूपी सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी। वहीं, इस मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा है। प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, “मिर्जापुर के एक स्कूल में बच्चों को मिड-डे-मील में नमक रोटी दी जा रही है। ये उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार की व्यवस्था का असल हाल है। जहाँ सरकारी सुविधाओं की दिन-ब-दिन दुर्गति की जा रही है। बच्चों के साथ हुआ ये व्यवहार बेहद निंदनीय है।”

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