JNU में दलित-माइनॉरिटी रिसर्च सेंटर बंद किए जाने का लेटर निकला फर्जी, दर्ज हुई FIR

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JNU में चल रहा ‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन ऐंड इन्क्लूसिव पॉलिसी’ (CSDE) के बंद होने की खबर ने छात्रों में परेशानी बढ़ा थी। ये खबर इसलिए भी परेशान करने वाली थी क्योंकि ये लेटर HRD मिनिस्ट्री के हवाले से UGC ने JNU रजिस्ट्रार को भेजा था। अब पता लगाया जा रहा है कि (CSDE) को बंद करने का फरमान किसने भेजा? इसकी जांच दिल्ली पुलिस करेगी।

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JNU में चल रहे सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एण्ड इन्क्लूसिव पॉलिसी बंद होने की खबर केवल आफवाह निकली। इस पर देर शाम UGC ने एक बयान जारी कर कहा कि सेंटर को बंद करने की ऐसी कोई योजना नहीं है। UGC ने इस पत्र को फर्जी करार दिया है। इसके अलावा UGC अब इस पूरे मामले पर लीगल एक्शन लेने का मन बना चुकी है।

UGC के मुताबिक जिस लेटर के हवाले से यह कहा जा रहा है कि सेंटर बंद होगा वह लेटर फर्जी है। UGC के रेकॉर्ड के मुताबिक ऐसा कोई लेटर अंडर सेक्रटरी की तरफ से जारी ही नहीं किया गया। UGC के मुताबिक जेएनयू को जो लेटर रिसीव हुआ है वह दिखाता है कि वह मुंबई के किसी नंबर से फैक्स किया गया है। UGC का मुंबई में कोई ऑफिस नहीं है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, इस संबंध में भारत सरकार के डिप्टी सेक्रटरी स्तर के अधिकारी की शिकायत पर आईपी एस्टेट थाने में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और षड्यंत्र रचने की दफाओं में बीते बुधवार FIR दर्ज हो गई है।

पुलिस जांच करेगी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC ) की ओर से जेएनयू को भेजे गए फर्जी लेटर के पीछे किसकी साजिश थी UGC ने बयान जारी कर कहा कि इस सेंटर को फंड मिलता है और UGC इसी आधार पर 1 अप्रैल 2017 से आगे भी फंड देना जारी रखेगा।

 

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