पूरे साल सबसे अधिक विवादों में रहा जेएनयू

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साल की शुरूआत से लेकर अंत तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और विवादों का चोली दामन का साथ रहा। साल की शुरूआत में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से भारत विरोधी नारे लगाए जाने पर छात्रसंघ के नेता समेत कई छात्रों की गिरफ्तारी जहां दुनिया भर में सुखिर्यों में आ गयी, वहीं संस्थान के एक छात्र की गुमशुदगी साल के अंत तक एक पहेली बनी रही।

JNU Administrationइनके अलावा परिसर में एक शोध छात्रा के साथ कथित बलात्कार की घटना को लेकर भी संस्थान खबरों में बना रहा। इस साल नौ फरवरी को संस्थान के छात्रों ने वर्ष 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को दी गयी फांसी के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। इस दौरान कुछ अज्ञात छात्रों ने कथित रूप से भारत विरोधी नारेबाजी की।

najeeb-jnuघटना के चार दिन बाद दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ देशद्रोह और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया। बाद में दो और छात्रों उमर खालिद एवं अनिरबान भट्टाचार्य को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

भाषा की खबर के अनुसार, शुरूआती जांच के आधार पर कन्हैया और सात अन्य छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गयी।

JNUSUजेएनयू छात्रों पर देशद्रोह का मामला चलाने का सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी विरोध हुआ। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने तो इसे जायज ठहराया लेकिन विपक्षी दलों ने इसकी निंदा की।

साथ ही नोम चोमस्की, ओरहान पामुक, शेल्डन पोलॉक सहित 130 से अधिक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं को दबाने के लिए छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने को ‘‘भारत सरकार की शर्मनाक कार्रवाई’’ बताया।

बाद में कन्हैया को पटियाला हाउस अदालत में सुनवाई के लिए ले जाते समय वकीलों के एक समूह ने उसके साथ मारपीट की।

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