किसान आंदोलन: हरियाणा में BJP के सहयोगी दल JJP ने कहा- बिना किसी देरी के मामले का समाधान किया जाना चाहिए

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केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान आंदोलन को लेकर देश की सियासत भी लगातार गरमाती जा रही है। इस बीच, हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने किसान आंदोलन पर बड़ा बयान दिया है। पार्टी ने बुधवार को कहा कि बिना किसी देरी के किसान आंदोलन का हल ढूंढना होगा।

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फाइल फोटो: टिकरी बॉर्डर (जनता का रिपोर्टर, सुरेश कुमार)

जजपा नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के साथ नियमित संपर्क में हैं। बता दें कि, केन्द्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

चौटाला ने कहा, “जो किसान (विरोध प्रदर्शन पर) बैठे हैं, हम वास्तव में उनके लिए चिंतित हैं, वे हमारे परिवार के सदस्य हैं।” उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के भाई और जजपा के प्रमुख अजय सिंह चौटाला के बेटे दिग्विजय सिंह चौटाला ने किसानों के मुद्दे पर सवालों का जवाब देते हुए कहा, ”राजग सरकार किसानों की सरकार है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसान-समर्थक हैं।”

उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से, एक समाधान ढूंढना होगा और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इसमें जितनी देर होगी, उतने अधिक लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने कहा, “उन मुद्दों को लेकर निष्कर्ष तक पहुंचना होगा, जिन पर वे (किसान) आंदोलन कर रहे हैं।” दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार के लगातार संपर्क में है।

दरअसल, हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार को सहयोग देने वाली जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का आधार वोटर जाट और किसान माने जाते हैं। किसान आंदोलन के कारण एनडीए सहयोगी जेजेपी पर काफी दबाव है। पार्टी अपने कोर वोटर्स को नाराज नहीं करना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि हरियाणा में किसानों के विरोध-प्रदर्शन को पार्टी के नेता समर्थन दे चुके हैं।

गौरतलब है कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब-हरियाणा के हजारों किसान दिल्ली से लगती सीमाओं के प्रवेश मार्गो पर पिछले साल नवंबर से डटे हुए हैं। किसानों को आशंका है कि इन कानूनों के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा। (इंपुट: भाषा के साथ)

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